Farmers Protest Updates: राकेश टिकैत ने MSP का बताया मतलब, कहा-कोई समझौता नहीं होगा

केंद्र सरकार के तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर संग्राम छिड़ा है। नवंबर से जारी आंदोलन के बीच किसान संगठनों के नेताओं की केंद्र सरकार से अब तक 11 राउंड की वार्ता हो चुकी है लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ओडिशा की अपनी पहली यात्रा में कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग दोहराई है।

टिकैत ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कोई समझौता नहीं होगा। मंडी का मतलब एमएसपी नहीं, हमें इस पर कानून चाहिए। किसान नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार को एमएसपी पर कानून बनाना पड़ेगा, पूरे देश में बैठकें चल रही है चुनावी राज्यों में किसान आंदोलन का असर जरूर पड़ेगा। किसान नेता ने मीडिया से कहा कि सरकार को एमएसपी पर कानून बनाना पड़ेगा। सरकार को तीनों नए बिलों को वापस लेना पड़ेगा। ये लुटेरों की सरकार है ये देश में नहीं रहेगी।

टिकैत ने कहा कि मंडी का मतलब एमएसपी नहीं है। खरीद का मतलब है जब कानून बन जाएगा तो पूरी खरीद होगी। टिकैत ने ओडिशा में सत्तारूढ़ BJD सरकार से आग्रह किाय है कि वह कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए किसानों का समर्थन करें। बता दें कि 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद आंदोलन धीमा पड़ गया था लेकिन गाजियाबाद बॉर्डर पर मीडिया से मुखातिब होते वक्त राकेश टिकैत के छलके आंसुओं ने आंदोलन में एक नई जान फूंकी। इसके बाद से आंदोलन देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गया।