Airport Privatisation: देश के इन चार एयरपोर्ट में बची हिस्सेदारी भी बेचेगी मोदी सरकार…..

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार दिल्ली, बेंगलुरू, मुंबई और हैदराबाद एयरपोर्ट मे अपनी बची हुई हिस्सेदारी को बेचने की तैयारी में है। इस साल के बजट मं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी संपत्तियों को बेचकर पैसे जुटाने का ऐलान किया था। यह उसके महत्वाकांक्षी 205 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार ने अतिरिक्त संसाधन जुटाने के उद्देश्य से इनकी पहचान की है।

केंद्र सरकार ने अतिरिक्त संसाधन जुटाने के उद्देश्य से इनकी पहचान की है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया इन चार एयरपोर्ट में बाकी बची हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इसके साथ ही 13 अन्य एयरपोर्ट को वित्त वर्ष 2021-22 में निजीकरण के लिए पहचाना गया है। पिछले महीने सचिव की एक समिति में हुई चर्चा की जानकारी रखने वाले लोगों ने यह बात साझा की है। देश के चार बड़े एयरपोर्ट में सरकार की बाकी बची हिस्सेदारी को बेचने की करें तो इससे मोदी सरकार को 20 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इसके लिए मंत्रालय ने आवश्यक औपचारिकताएं शुरू कर दी है।

इन चारों एयरपोर्ट में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की बची हिस्सेदारी बेचने के साथ ही 13 दूसरे एयरपोर्ट के निजीकरण की भी तैयारी की जा रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय दिल्ली, बेंगलुरू, मुंबई और हैदराबाद हवाई अड्डों का संचालन कर रहे संयुक्त उपक्रमों में एएआई की इक्विटी हिस्सेदारी के विभाजन के लिए आवश्यक मंजूरी प्राप्त करेगा। निजीकरण के लिए जिन 13 एयरपोर्ट की पहचान की गई है उनमें मुनाफा देने वाली और नुकसान वाले एयरपोर्ट को साथ में लाने की संभावनाओं को तालाशा जा रहा है। बता दें पिछले साल मोदी सरकार के निजीकरण के पहले चरण में अडानी समूह ने 6 एयरपोर्ट हासिल किए थे।