Ambedkar Jayanti 2021: आज है डॉ. अंबेडकर की 130वीं जयंती, पढ़ें बाबा साहेब के अनमोल विचार

हर साल 14 अप्रैल को भारतवर्ष में अंबेडकर जयंती मनाई जाती है। इसी उपलक्ष में बाबा साहेब के भारत की स्वतंत्रा में अमूल्य योगदान को अंबेडक जयंती को याद किया जाता है। साल 2015 से अंबेडकर जयंती को केंद्र सरकार ने सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। उन्हें 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। बाबा साबेह भीमराव अंबेडकर का जीवन संघर्षों और सफलता की मिसाल बनकर उभरा। 

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दलितों के हक की लड़ाई लड़ने वाले डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महु में हुआ था। भारत के संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर ने दलितों को शिक्षा का पाठ पढ़ाया। जाति प्रथा,  भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त करने में अम्बेडकर का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होने सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ कई जन आंदोलन चलाकर लोगों की आवाज बने। दलित समाज से तालुक रखने वाले बाबा साहेब अम्बेडकर ने कई यातनाएं झेली, जिनका गहरा उसर उनके व्यक्तित्व पर पड़ा। डॉ अम्बेडकर को दलितों के मसीहा के रूप में पहचाना जाता है। बाबा साहेब अंबेडकर खुद एक दलित थे। इस कारण बचपन से ही उन्हें कई परेशानी उठानी पड़ी।

डॉ अंबेडकर के अनमोल विचार-

आपको जब तक सामाजिक स्वतंत्रता नहीं मिल जाती कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिए बेमानी है। समानता एक काल्पनिक हो सकता है लेकिन इसे गवर्निंग सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना होगा।

अगर मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है तो मैं उसे सबसे पहले जलाऊंगा।

एक विचार को भी प्रसार की आवश्यकता होती है जितनी की पौधे को पानी की। नहीं तो दोनों मुरझा जाएंगे।

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