Bengal Election 2021: चुनाव प्रचार के बीच चरमरा गई अर्थव्यवस्था, रोजगार में गिरावट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुद्दा सिर्फ टीएमसी बनाम बीजेपी का नहीं है बल्कि राज्य की चरमराती अर्थव्यवस्था भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। सीएम ममता के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर होने के पीछे एक वजह स्थानीय स्तर पर होने वाला भ्रष्टाचार, रुका पड़ा औद्योगिकरण, कमजोर क्रेडिट ग्रोथ, नए रोजगार ना होना, कृषि क्षेत्र पर होने वाला खर्च और बुनियादी ढांचे का विकास ना होना है।

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2019-20 में पश्चिम बंगाल की विकास दर 7.26 फिसदी थी जो उसी साल राष्ट्रीय विकास दर से 4 फीसदी से ज्यादा थी। लेकिन 2015-16 से 2019-20 के बीच पांच सालों में से चार साल के दौरान बंगाल की विकास दर की वृद्धि राष्ट्रीय स्तर की तुलना में कम रही है।  2018 से 2020 की चौथी तिमारी के बीच जहां पूरे देश के बैंकों के क्रेडिट में 20 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं बंगाल में यह सिर्फ 10 फीसदी रही। इन दो सालों के भीतर जहां देशभर में बैंक डिपोजिट में 19.8 फीसदी की वृद्धि दिखी।

बंगाल में यह सिर्फ 14.1 फीसदी रही। लेकिन आबादी के हिसाब से चौथे सबसे बड़ा राज्य में बेरोजगारी भी एक अहम मुद्दा है। फरवरी 2021 के सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में बेरोजगारी दर 6.2 फीसदी थी जो राष्ट्रीय दर 6.9 फीसदी के आंकड़ों से कम थी। हालांकि, राज्य 27 राज्यों में 17वें पायदान पर था। राज्य सरकार पर केंद्रीय योजनाओं को लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया है। जिनमें पीएम स्वनिधि योजना, आयुष्मान भारत और पीएम किसान सम्मान निधि योजना शामिल हैं।

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