Trending: बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि आज, धीमा जहर देकर अंग्रेजों ने मारा, ट्विटर पर #BirsaMunda ट्रेडिंग

आदिवासी समुदाय जल, जंगल और जमीन को लेकर सदियों से संघर्ष कर रहे हैं। एक विद्रोह के जनक की आज पुण्यतिथि है। आदिवासियों के भगवान माने जाने वाले बिरसा मुंडा का आज के दिन 1900 में रांची की जेल में निधन हो गया था। 1895 में बिरसा ने अंग्रेजों द्वारा लागू की गई जमींदारी और राजस्व व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई छेड़ी। बिरसा ने सुदखोर महाजनों के खिलाफ भी बगावत की।

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ब्रिटिश शासकों की जंगलों पर हमेशा से नजर थी और आदिवासी जंगलों को अपनी जननी मानते हैं। इसके चलते जब ब्रिटिशों ने इन जंगलों को हथियाने की कोशिशें की तो आदिवासियों में असंतोष पनपा। बता दें कि छोटानागपुर पठार के आदिवासी क्षेत्र में जन्मे बिरसा मुंडा ने बचपन से ही आदिवासियों के आधिकारियों के लिए लड़ाई शुरू की थी। एक जर्मन मिशन स्कूल में बिरसा मुंडा ने पढ़ाई की लेकिन कुछ सालें में उन्होंने पढ़ाई को छोड़ दी। अंग्रेजों के अत्याचार को देखते हुए बिरसा मुंडा ने ‘बिरसैत’ नामक अपना संप्रदाय शुरू किया। मुंडा और उरांव जनजाति के कई लोग उनके संप्रदाय और उनके आंदोलन में शामिल हो गए।

ब्रिटिश शासकों के अत्याचारों के बारे में उनकी जागरूकता बढ़ती गई। बिरसा मुंडा ने 1886 और 1890 के बीच चाईबासा में मिशनरी विरोधी गतिविधियों में भी भाग लिया। ब्रिटिश पुलिस ने बिरसा मुंडा को 3 मार्च 1900 को गिरफ्तार किया था। बिरसा मुंडा को अंग्रेजों ने यहां उन्हें धीमा जहर दिया जिससे 9 जून को रांची की जेल में उनकी मौत हो गई थी। 15 नवंबर 2000 को उनकी जयंती पर झारखंड को बिहार से अलग करके बनाया गया था।

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