12वीं बोर्ड और CUET की डबल चुनौती, ऐसे बनाएं स्मार्ट स्टडी प्लान
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET के रजिस्ट्रेशन फॉर्म जारी होते ही लाखों छात्रों की चिंता बढ़ गई है। वजह साफ है। एक तरफ 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी है, तो दूसरी ओर CUET का दबाव। ऐसे में यह सवाल हर स्टूडेंट के मन में आता है कि क्या पढ़ें, कैसे पढ़ें और किसे ज्यादा प्राथमिकता दें। क्योंकि बोर्ड के बाद कॉलेज तक पहुंचने का रास्ता CUET से होकर ही जाता है।
दिल्ली की लीना जैसे कई छात्र इस समय प्री-बोर्ड, बोर्ड और CUET तीनों की तैयारी एक साथ कर रहे हैं। सही रणनीति के बिना यह संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है।
क्या है CUET और क्यों है यह जरूरी
CUET एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जिसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आयोजित करती है। इसके जरिए देश की 48 केंद्रीय, 36 राज्य, 26 डीम्ड और 113 प्राइवेट यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिला मिलता है। इसके अलावा कई सरकारी संस्थान भी CUET स्कोर के आधार पर एडमिशन देते हैं।
एनटीए के अनुसार CUET देने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। हालांकि, यूनिवर्सिटी के अपने नियम लागू होते हैं।
CUET का एग्जाम पैटर्न समझना जरूरी
CUET परीक्षा तीन सेक्शन में होती है। पहला सेक्शन लैंग्वेज का होता है, जिसमें 13 भाषाओं में से एक चुननी होती है। दूसरा सेक्शन डोमेन सब्जेक्ट्स का होता है, जो 12वीं के विषयों पर आधारित होते हैं। तीसरा सेक्शन GAT यानी जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट का होता है, जिसमें रीजनिंग, गणित और जनरल नॉलेज शामिल होती है।
हर विषय में 50 सवाल पूछे जाते हैं। सही जवाब पर 5 अंक मिलते हैं, जबकि गलत जवाब पर 1 अंक कटता है। हर पेपर के लिए 60 मिनट का समय होता है।
बोर्ड के साथ CUET की तैयारी कैसे करें
एक्सपर्ट्स का मानना है कि 12वीं का सिलेबस ही CUET की तैयारी का बेस है। इसलिए सबसे पहले बोर्ड की पढ़ाई पर फोकस करना चाहिए। इससे डोमेन सब्जेक्ट्स की तैयारी अपने आप हो जाती है। साथ ही, रोज़ाना थोड़ा समय लैंग्वेज और GAT की प्रैक्टिस के लिए निकालना चाहिए।
डोमेन सब्जेक्ट वही चुनें, जो 12वीं में पढ़े हों। इससे स्कोर बेहतर आने की संभावना बढ़ती है। मॉक टेस्ट और पिछले साल के प्रश्नपत्र हल करना भी बहुत मददगार साबित होता है।
स्मार्ट प्लानिंग से मिलेगी सफलता
CUET और बोर्ड की तैयारी एक-दूसरे की पूरक है। सही टाइम टेबल, नियमित रिवीजन और स्ट्रैटेजिक पढ़ाई से दोनों परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है।
