UP-बिहार के मजदूरों से ज्यादा काम कराने लिए दी जाती है ड्रग्स, केंद्र की चिट्ठी से बवाल

कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच पिछले पांच महीने से तनाव बना हुआ है। हालांकि, अब एक विवाद के चलते किसान आंदोलन में नया मोड़ आ सकता है। दरअसल, हाल ही में केंद्र सरकार ने बीएसएफ की एक जांच का हवाला देते हुए पंजाब सरकार से कहा है कि राज्य के खेतों में बिहार और यूपी से काम करने आए कृषि मजदूरों को ड्रग्स दी जाती है, ताकि वे ज्यादा घंटे तक काम कर सकें।

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केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार से इस जांच के आधार पर कार्रवाई करने को भी बोला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 17 मार्च को पंजाब के डीजीपी और मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि 2019-20 में बीएसएफ ने पंजाब के सीमांत जिलों से 58 कृषि मजदूरों को पकड़ा था। हालांकि, केंद्र सरकार की इस चिट्ठी पर कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठनों प तीखी प्रतिक्रिया आई है। भारतीय किसान यूनियन के महासचिव जगमोहन सिंह ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार किसानों की छवि को खराब करना चाहती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने केंद्र सरकार की चिट्ठी में लिखी बातों की पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने इसमें सामने आए तथ्यों को अवास्तविक करार दिया। एनडीए की पूर्व सहयोगी रही शिरोमणी अकाली दल ने कहा कि यह चिट्ठि सिर्फ राज्य के किसानों को बदनाम करने के लिए है। केंद्र की पंजाब के मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल को पता चला कि इन 58 लोगों को अच्छी पगार के वादे के साथ पंजाब लाया गया था लेकिन इनका शोषण किया गया। इन्हें नशीले पदार्थ देकर अमानवीय स्थितियों में काम करने को मजबूर किया गया। 

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