Oxygen Crisis in India: देश में ऑक्सीजन को लेकर क्यों मचा हाहाकार, तो मरीजों की कैसे बचेगी जिंदगी?

देश में कोरोना महामारी को लेकर हाहाकार मचा है। संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों से सरकारों के पसीने छूट रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से चरमरा गई है। अस्पतालों में बेड, दवाओं और ऑक्सीजन की किल्लत मची है। लेकिन केंद्र सरकार का दावा है कि ऑक्सीजन की देश में कोई कमी नहीं है। ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाकर 9000 टन हर रोज कर दिया है। रियालंस सहित कई बड़ी कंपनियां ऑक्सीजन के उत्पादन में लगी हुई है। ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि फिर ऑक्सीजन जा कहां रही है?

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 ऑक्सीजन लेने के लिए 2-2 दिन से लोग कतारों में लगे हुए हैं। लेकिन फिर भी लोगों का नंबर नहीं आ रहा है। कई अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए हैं कि हमारे पास मरीजों के लिए ऑक्सीजन नहीं है। अस्पताल परिजनों को ऑक्सीजन के लिए दौड़ा रहे हैं।  मरीजों के परिजनों के लिए सबसे विकट घड़ी है। आंखों के सामने दम तोड़ते अपनों का दर्द लोगों की जुबां से छलक रहा है। लोग कोरोना और सरकारी सिस्टम के सामने बेबस नजर आ रहे हैं।

Case-

  1. कर्नाटक के चामराजनगर जिले के सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 24 मरीजों की मौत हो गई। इनमें से 23 कोरोना मरीज थे। दो दर्जन मरीजों की मौत पर प्रशासन ऑक्सीजन की कमी से पल्ला झाड़ता रहा। मामला प्रकाश में आने के बाद मंत्री एस सुरेश ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने जिला कलेक्टर से बात कर हालात के बारे में जाना और मंगलवार को आपात कैबिनेट बैठक बुलाई है।
  2. उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक अस्पातल में ऑक्सीजन की अभाव में 5 मरीजों की मौत हो गई। प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी को स्वीकार करते हुए कहा है कि कोरोना मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के सामने विकट हालात हो गए हैं।
  3. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी ऑक्सीजन को लेकर हालात बेकाबू हो गए हैं। केजरीवाल सरकार ने सेना की मदद मांगी। लोगों को ऑक्सीजन और बेड नहीं मिलने से सांसे टूट रही है।

ऐसे हालात पूरे देश में बने हुए हैं, जहां अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन सहित अन्य उपकरणों को लेकर हाहाकार मचा है। केंद्र और राज्य सरकारें कोरोना के बढ़ते मामलों को रोकने और ऑक्सीजन संकट से पार पाने के लिए पूरी कोशिश में लगी हुई है लेकिन हालात काबू से बाहर होते दिखाई दे रहे हैं। कोरोना की रफ्तार ने सरकारों की रफ्तार को काफी पीछे छोड़ दिया है। सवाल ये भी है कि अचानक से इतनी ऑक्सीजन की कमी क्यों आ गई। दरअसल, कोरोना फेफड़ों, लंग्स पर अटैक करता है। सांस लेने में तकलीफ होने पर चिकित्सक ऐसे मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखते हैं।

कोरोना के हालात को देखते हुए कई लोग ऑक्सीजन सिलेंडरों को अपने घरों में स्टोक कर रखे हैं ताकि कभी किसी परिजन को ऑक्सीजन की जरूरत ना पड़ जाए। हालांकि ये सरासर गलत है। अभी गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन मिलना जरूरी है। ऑक्सीजन की कमी को लेकर बड़ी वजह कोरोना के तेजी से बढ़ते मामले रहे हैं। फिलहाल सरकारों के सामने ऑक्सीजन और कोरोना संकट से निजात पाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके लिए केेंद्र से लेकर राज्य सरकारें पूरी कोशिश में लगी है।

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