Covid 19 India: मार्च में निचले स्तर पर पहुंचा PMI, जानें मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर क्या पड़ेगा असर

कोरोना महामारी का देश में फिर से प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कोरोना पर काबू पाने के लिए देश में टीकाकरण अभियान चल रहा है। वैक्सीनेशन में तेजी लाने के लिए 8 अप्रैल को पीएम मोदी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने वाले हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों ने जहां सरकार की टेंशन बढ़ाई है वहीं इसका व्यापक असर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर भी देखने को मिल रहा है।

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पिछले साल कोरोना पर काबू पाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बीच लंबे तक फैक्ट्रियों के बंद रहने से सप्लाई बाधित होने से तगड़ा नुकसान हुआ है। मार्च में मैन्युफैक्चरिंग पर पीएमआई 7 महीने के निचले स्तर पर पर आ ठहरा। यह 57.4 से गिरकर 55.4 पर पहुंच गया है। कोरोना की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण घरेलू मांग और उत्पादन में भारी गिरावट आई। इसके चलते कई कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी। वहीं कुछ ने अपने कर्मियों की सैलरी में कटौती की। इससे कर्मचारियों के साथ कंपनियों को भी नुकसान का सामना करना पड़ा। एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी का प्रकोप दोबारा बढ़ रहा है।

ऐसे में पिछले हफ्ते भारत सरकार ने कई राज्यों को वायरस के तेजी से प्रसार को नियंत्रित करने की सलाह दी हैं। कई गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाने के भी सुझाव दिए गए हैं। ऐसे में कारखाने में काम करने वाले और पूरे मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए अप्रैल का महीना मुश्किल भरा रह सकता है। सर्वेक्षण के अनुसार, कोरोना के बढ़ने से मांग में वृद्धि हुई है जबकि इनपुट खरीद में बढ़ोतरी से लागत में कमी आई है। भारतीय निर्माता अप्रैल में एक चुनौती का सामना कर सकते हैं।

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