delhi NCT Bill से दिल्ली में क्यों मचा है बवाल, जानिए केंद्र के नए बिल में क्या है….

केंद्र सरकार और दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में फिर से टकराव बन गया है। सोमवार को लोकसभा में पेश किए गए विधेयक में उप राज्यपाल को ज्यादा अधिकार दिए जाने का प्रावधान है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य कैबिनेट या सरकार के किसी भी फैसले को लागू करने से पहले एलजी की राय आवश्यक होगी। आखिर इस बिल में क्या है जिससे दोनों सरकारों के बीच खींचतान शुरू हो चुकी है।

सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस बिल को अंसवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार दिया है। हालांकि, केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी का कहना है कि इससे कॉर्डिनेशन आसान हो जाएगा। सवाल है कि आखिर इस बिल में क्या है जिससे दोनों सरकारों के बीच खींचतान शुरू हो चुकी है।

केंद्र सरकार वर्तमान अधिनियम की धारा 44 में एक नया प्रावधान जोड़ना चाहती है। प्रस्तावित संशोधन कहता है कि दिल्ली में लागू किसी भी कानून के तहत सरकार, राज्य सरकार, उप राज्यपाल या किसी के फैसले को लागू करने से पहले ऐसे सभी विषयों के लिए एलजी की राय लेनी होगी।

संशोधन बिल के मुताबिक, विधानसभा का कामकाज लोकसभा के नियमों के हिसाब से चलेगा। यानी विधानसभा में जो व्यक्ति मौजूद नहीं है या उसका सदस्य नहीं है उसकी आलोचना नहीं हो सकेगी।

दिल्ली सरकार को कोई भी फैसला लागू करने से पहले एलजी की राय लेनी होगी। इसमें मंत्रिमंडल के फैसले भी शामिल होंगे।

विधानसभा या उसकी कोई समिति प्रशासनिक फैसलों की जांच नहीं कर सकती है और उल्लंघन में बने नियम रद्द हो जाएंगे।

विधानसभा के बनाए किसी भी कानून में सरकार का मतलब एलजी होगा।

एलजी उन मामलों में दखलल दे सकेंगे जिनमें उनकी राय मांगी जानी चाहिए। 

एक ओर प्रस्ताव में केंद्र ने कहा है कि एलजी विधानसभा से पारित किसी ऐसे बिल को मंजूरी नहीं देंगे जो विधायिका के शक्ति-क्षेत्र से बाहर हैं।