नाम की गलती बनी किसानों की मुसीबत, KCC रजिस्ट्रेशन अटका

भोजपुर जिले में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के लिए चल रही केंद्र सरकार की पंजीकरण प्रक्रिया किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। आधार कार्ड और जमाबंदी में नाम के अंतर के चलते जिले के करीब 80 से 90 प्रतिशत किसान अब तक अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए हैं। नाम की स्पेलिंग, उपनाम या स्थानीय उच्चारण के फर्क ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

दरअसल, पंजीकरण की सबसे अनिवार्य शर्त यह है कि किसान के आधार कार्ड पर दर्ज नाम और जमीन से जुड़े दस्तावेज यानी जमाबंदी में लिखा नाम पूरी तरह एक जैसा होना चाहिए। लेकिन भोजपुर में ज्यादातर जमाबंदियां दशकों पुरानी हैं, जो हाथ से लिखी गई थीं। उस समय स्थानीय बोली और उच्चारण के आधार पर नाम दर्ज किए गए, जिससे आज आधार से उनका मेल नहीं बैठ पा रहा है।

इस तकनीकी समस्या के कारण किसान लगातार अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई किसानों का कहना है कि ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान नाम में जरा-सा अंतर भी होने पर आवेदन रिजेक्ट हो जा रहा है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में भी देरी हो रही है।

अधिकारी किसानों को परिमार्जन पोर्टल के माध्यम से नाम में सुधार कराने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन यह प्रक्रिया भी सरल नहीं है। दस्तावेजों की जांच और लंबी प्रक्रिया के कारण सुधार में समय लग रहा है। किसानों की मांग है कि सरकार इस नियम में कुछ लचीलापन लाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान बिना अड़चन के पंजीकरण करा सकें और योजनाओं का लाभ उठा सकें।