Govind Dev Ji temple: जयपुर के राजा हैं गोविंद देवजी, बिना शिखर का है इनका मंदिर

राजस्थान में कई ऐतिहासिक दुर्ग, महल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रदेश की संस्कृति ने पर्टयकों को नई पहचान दी है। धार्मिक आस्था के लिए यहां महलों के बीच कई ऐतिहासिक छोटे बड़े मंदिर है, जहां दर्शन कर शांति की कामना करते श्रद्धालु हमेशा दिखाई देते हैं।  इसी कड़ी में जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर, राजस्थान का प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्थल है।

क्या है गोविंद देवजी मंदिर का इतिहास

भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह मंदिर जयपुर का सबसे प्रसिद्ध बिना शिखर वाला मंदिर है। यह चंद्र महल के पूर्व मे बने जननिवास बगीचे के मध्य स्थित है। संरक्षक देवता गोविंद देवजी की मूर्ति पहले वृंदावन के मंदिर में स्थापित थी, जिसको सवाई जयसिंह द्वितीय ने अपने परिवार के देवता के रूप में यहां पुन स्थापित किया था। बता दें कि आराध्य गोविंददेवजी मंदिर का इतिहास करीब 250 साल से ज्यादा पुराना है. जो जयपुर की स्थापना से पहले का है.उस वक्त गोविंद देव जी की प्रतिमा जयपुर परकोटे के बीच में नहीं, आमेर के पास कनक वृंदावन में विराज मान थी, तब यहां कोई घर नहीं था। इस स्थान को आज भी पुराना गोविंद देवजी कहते हैं। राजा जयसिंह द्वितीय ने जयपुर की स्थापना की थी। महाराज जयसिंह के सपने में आने के बाद गोविंद देव जी की मूर्ति को जयपुर परकोटे के विराजमान किया गया।

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गोविंद देवजी मंदिर की स्थिति

जयपुर के परोकटा क्षेत्र में सिटी पैलेस परिसर में गोविंद देवजी मंदिर स्थित है। गोविंद देवजी जयुपर के आराध्य देव माने जाते हैं। शहर के राजमहल सिटी पैले के उत्तर में गोविंद देवजी मंदिर में हर रोज हजारों श्रद्धालु आते हैं। गोविंद देवजी राज परिवार के भी दीवान अर्थात मुखिया स्वरूप हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां लाखों की संख्या में भक्त भगवान गोविंद देवजी के दर्शनों को आते हैं। गोविंद देवजी का मंदिर चंद्र महल गार्ड से लेकर उत्तर में तालकोटरे तक विशाल परिसर में फैला हुआ है। इस मंदिर में अने देवी देवताओें के भी मंदिर है। यहां निर्मित सभा भवन का गिनिज बुक में नाम दर्ज किया है।

सबसे कम खंबो पर टिका है ये मंदिर

गोविंद देवजी मंदिर परिसर सबसे कम खंबो पर टिका सबसे बड़ा सभागार है। बडी़ चौपड़ से हवामहल मार्ग से सिरह ड्योढी दरवाजे के अंदर स्थित जलेब चौक के उत्तरी दरवाजे से गोविंद देवजडी मंदिर परिसर में प्रवेश होता है। इस दरवाजे से दांयी तरफ गौडीय संप्रदाय के संत चैतन्य महाप्रभु का मंदिर विराजमान है। बायें हाथ की तरफ हनुमान जी मंदरि, राम दरबार, शिवालय और माता का मंदिर है। बायें हाथ की ओर गोविंद देवजी मंदिर में प्रवेश करने के लिए विशाल दरवाजा है। 

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