Hanuman Jayanti 2021: क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती, जानिए बजरंग बली को कैसे करें प्रसन्न?

हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस साल ये दिन 27 अप्रैल, मंगलवार को मनाया जा रहा है। भगवान हनुमान जी के भक्त इस दिन थोड़े से प्रयासों से ही बजरंग बली को प्रसन्न कर लेते हैं।  सवाल है कि हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है? दरअसल, हिंदू धर्म के लोग हनुमान जयंती को पूरे देश में धूमधाम से मनाते हैं लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण घर से ही इस पावन पर्व पर भक्त बजरंग को खुश करने में लगे हैं। सारे दुखों को दूर करने वाले बजरंग की पूजा अर्चना कर कोरोना संकट से निजात दिलाने के लिए कामना की जा रही है।

हर साल दो बार क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती

हनुमान जयंती हर साल दो बार मनाई जाती है। दो बार मनाने के पीछे अलग-अलग मान्यताएं है। एक तिथि को हनुमान जयंती भगवान हनुमान जी के जन्म दिवस के तौर पर मनाया जाता है। दूसरी तिथि की हनुमान जयंती विजय अभिनंदन समारोह के तौर पर मनाई जाती है। हनुमान जयंती पर्व श्रद्धालु जोश और उत्साह के साथ मनाते हैं। बजरंग को प्रसन्न करने के लिए पूजा अर्चना कर मनोकामना करते हैं।

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उत्तर भारत में क्या है विशेष

इस दिन कई शहरों में बड़ी-बड़ी झांकिया निकाली जाती है। कुछ लोग हनुमान जयंती पर व्रत भी रखते हैं। हनुमान जयंती हर वर्ष दो तिथियों को मनाई जाती है। पहली हनुमान जयंती हिंदी कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। जबकि दूसरी हनुमान जयंती कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन मनाई जाती है। क्योंकि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, मंगलवार को हुआ था। लेकिन उत्तर भारत में चैत्र शुक्ल माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाने वाली हनुमान जयंती ज्यादा प्रसिद्ध है।

क्या शिवजी का अवतार हैं भगवान हनुमान जी

पुराणों के अनुसार, हनुमानजी को भगवान शिव का 11वां अवतार माना जाता है। हनुमान जयंती भगवान हनुमानजी के जन्मदिवस के तौर पर मनाई जाती है। हनुमानजी का जन्म माता अंजनी की कोख से हुआ था। बजरंग को अंजनिपुत्र, महाबली, रामेष्ट, बजरंगबली नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि जब हनुमान जी का जन्म हुआ तो उन्हें तेज भूख लगी तो वे सूर्य को फल समकर खाने के लिए बढ़े। उसी दिन राहु भी अपना ग्रास बनाने के लिए सूर्य की तरफ आ रहा था। इसलिए सूर्यदेव ने हनुमानजी को राहु समझ लिया था।

जानिए कैसे करें हनुमानजी की पूजा

हनुमानजी को केसरी रंग भाता है। इस वजह से उनकी पूजा में केसरी रंग का ज्यादा प्रयोग करें। साफ लाल कपड़े को बिछाएं। हनुमान जी के साथ भगवान राम की तस्वीर भी रखें। अब हनुमानजी को लाल सिंदूर और चोला अर्पित करें। पहले भगवान राम का पूजन करें और उन्हें फूल-फल आदि अर्पित करें। हनुमानजी को फूल और लड्डू चढ़ाएं। अब हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमानजी को खुश करने के लिए चमेली के तेल का उपयोग करें। बजरंग को चमेली का तेल अर्पित करें और जीवन में आए सारे कष्ट दूर करने के लिए प्रार्थना करें। हनुमानजी की पूजा लाल सिंदूर से की जाए तो हर बिगड़ा हुआ काम सही बन जाता है। बता दें कि भगवान श्रीराम की लंबी उम्र के लिए एक बार हनुमानजी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर चढ़ा लिए थे। इस कारण उन्हें और उनके भक्तों को सिंदूर चढ़ाना अच्छा लगता है, जिसे चोला कहते हैं।

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