Hindu New Year 2021: चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि को ही क्यों मनाया जाता है हिंदू नव वर्ष, 90 साल बाद बना ये संयोग

भारत में हिंदु नववर्ष चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। इस नवसंवत के नाम से जाना जाता है। इस साल 13 अप्रैल यानी आज यह तिथि पड़ रही है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष 2078 की शुरुआत हो गई है। माना जाता है कि सृष्टि के रचना करने वाले ब्रह्माजी ने इसी दिन से संसार की रचना को शुरू किया था।

विक्रम संवत के नाम से बनी पहचान

हिंदू नववर्ष को विक्रम संवत के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र शुक्ल की पहली तिथि से विक्रम संवत न केवल नवरात्रि में दुर्गा पूजा की शुरुआत होती है बल्कि भगवान राम का राज्याभिषेक, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक और सिख समुदाय के द्वीतय गुरू अंगददेव ने धरती पर जन्म लिया था।

चैत्री महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि क्यों है खास

दुनियाभर में प्राचीन काल में मार्च को ही वर्ष का पहला महीना माना जाता था। आज भी बहीखाते का नवीनीकरण और मंगलकार्य की शुरुआत मार्च में होती है। ऋतु, मास, तिथि-पक्ष और ज्योतिष विद्या में ग्रह की गणना भी चैत्र प्रतिपदा से ही की जाती है।

 

90 साल बाद बना ये संयोग

ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक, इस बार नव-संवत्सर में विशेष योग बन रहा है जो हानिकारक कारणों का संकेत है। हिंदू धर्म के ग्रथों के अनुसार, इस समय नव-संवत्सर 2077 चल रहा है। पुराणों में कुल 60 संवत्सरों का जिक्र किया गया है। नवसंवत्सर 2078 का नाम आनंद होना चाहिए था लेकिन ग्रहों के कुछ ऐसे योग बन रहे हैं कि इस हिंदू नववर्ष का नाम राक्षस होगा।

इस दिन क्या करें

चैत्र महीने की शुरुआत शुक्ल प्रतिपदा से होती है। माना जाता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से ही सत युग का प्रारंभ होता होता है। इस महीने के प्रारंभ से चार महीने तक जलदान करना चाहिए।

ऐसे करें नववर्ष की पूजा

शास्त्रों के अनुसार, हिंदू धर्म के दो भाग होते हैं। पहला शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष। चैत्र के महीने की शुरुआत शुक्ल प्रतिपदा तिथि से होती है। शुक्ल का अर्थ होता है कि जब चंद्र की कलाएं बढ़ती है और फिर आखिर में पूर्णिमा आती है।