तुर्की-अजरबैजान की बढ़ी बेचैनी, आर्मेनिया में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तैयारी!

सीडीएस अनिल चौहान आर्मेनिया दौरे पर
आर्मेनिया में भारत के पिनाका रॉकेट सिस्टम की तैनाती के बाद रणनीतिक हलचल

पिनाका की तैनाती के बाद ब्रह्मोस मिसाइल डील की अटकलें, CDS अनिल चौहान का रणनीतिक दौरा

भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग एक नए रणनीतिक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के नेतृत्व में भारतीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आर्मेनिया पहुंचा है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दक्षिण कॉकस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।

भारत-आर्मेनिया रक्षा रिश्तों में नई मजबूती

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल का राजधानी येरेवन में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भारत की राजदूत नीलाक्षी साहा सिन्हा और आर्मेनियाई सशस्त्र बलों के उप प्रमुख मेजर जनरल तेमूर शाहनजार्यान ने प्रतिनिधिमंडल का अभिनंदन किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास और रक्षा सहयोग की झलक साफ दिखाई दी।

पिनाका पहले से तैनात, अब ब्रह्मोस की चर्चा

आर्मेनिया पहले ही भारत से करीब 2000 करोड़ रुपये की डिफेंस डील के तहत पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम खरीद चुका है। यह प्रणाली डीआरडीओ द्वारा विकसित और भारत में निर्मित है। पिनाका की तैनाती के बाद से ही तुर्की और अजरबैजान में असहजता देखी जा रही है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि सीडीएस अनिल चौहान की यात्रा के दौरान ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल समेत अन्य उन्नत हथियार प्रणालियों की खरीद पर भी बातचीत हो सकती है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ का असर क्षेत्रीय संतुलन पर

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की और अजरबैजान द्वारा पाकिस्तान का खुला समर्थन किया गया था। अजरबैजान पाकिस्तान और तुर्की से हथियार भी खरीदता है। ऐसे में भारत-आर्मेनिया सैन्य सहयोग इन देशों के लिए एक रणनीतिक झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ब्रह्मोस मिसाइल डील होती है, तो यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकती है।

आत्मनिर्भर भारत और ग्लोबल डिफेंस पोजिशन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही कह चुके हैं कि पिनाका की आपूर्ति भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को दर्शाती है। भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि तेजी से उभरता रक्षा निर्यातक बन चुका है। आर्मेनिया के साथ बढ़ता सहयोग इसी नीति का मजबूत उदाहरण है।

रणनीतिक मौजूदगी का विस्तार

विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण कॉकस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी भी बढ़ाएगा। इससे संयुक्त प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

Read More :- बजट के बाद कीमती धातुओं में हाहाकार, सोना-चांदी की कीमतें एक झटके में लुढ़कीं