ईरान में सत्ता परिवर्तन की आहट, कर्ज और वैश्विक नुकसान की पूरी तस्वीर

ईरान में पिछले कई दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने वहां की सियासी व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। सड़कों पर उतरे हजारों लोग बदलाव की मांग कर रहे हैं और सरकार की सख्ती के बावजूद आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे हालात में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल अहम हो गया है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है, तो आर्थिक रूप से किसे सबसे बड़ा झटका लगेगा।

राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी नजरें टिकी हैं। मार्च 2025 तक ईरान का कुल बाहरी कर्ज करीब 4.9 अरब अमेरिकी डॉलर बताया जा रहा है, जो वैश्विक मानकों के हिसाब से काफी कम है। 2008 में जहां यह कर्ज 28 अरब डॉलर से ज्यादा था, वहीं अब इसमें बड़ी गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान किसी एक बड़े देश पर भारी कर्ज के लिए निर्भर नहीं है।

जानकारों के मुताबिक ईरान का ज्यादातर कर्ज कुछ एशियाई और क्षेत्रीय साझेदारों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अगर सरकार बदलती भी है, तो किसी एक देश को सीधे तौर पर बड़ा वित्तीय नुकसान होने की संभावना कम है। हालांकि ऊर्जा, तेल और गैस सेक्टर से जुड़े देश और कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं।

ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कमजोर नहीं है। चालू खाते में अधिशेष, सीमित विदेशी निवेश और लगभग 120 अरब डॉलर की जीडीपी यह दिखाती है कि अस्थिरता के बावजूद देश आर्थिक रूप से खड़ा है। लेकिन अगर हिंसा और अनिश्चितता लंबी चली, तो निवेश, तेल बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका असर साफ दिखाई देगा।