Albert Hall Museum: जयपुर के अल्बर्ट हॉल की वो बड़ी बातें जो आपको जानना है जरूरी

Albert Hall Museum: जयपुर के रामनिवास बाग स्थित अल्बर्ट हॉल ने दुनियाभर में पहचान बनाई है। जयपुर को खूबसूरती देने वाला अल्बर्ट हॉल को बने हुए 135 साल पूरे हो चुके हैं। फरवरी 2021 में इसके स्थापना दिवस को लेकर जश्न मनाया गया था। राजस्थान का यह सबसे पुराना अल्बर्ट हॉल है। यह संग्रालय इंडो-सरेनिक वास्तुशैली में इसका निर्माण कराया गया। इस ईमारत को प्रिंस ऑफ व्हेल्स, अलबर्ट एडवर्ड के नाम से पहचाना जाता है।

अलबर्ट हॉल को सरकारी संग्रहालय के नाम से भी जाना जाता है। इसमें विश्व के अनेक क्षेत्रों से लाए हुए कलाकृतियों का संग्रह यहां देखने को मिलता है। हरे भरे बगीचे के बीच स्थित albert hall museum jaipur में कलाकृतियों का भंडार है। जो पर्यटकों को देखने के लिहाज से काफी दिलचस्प है। जयपुर के प्रमुख पर्यटक स्थलों में शुमार अलबर्ट हॉल को देखने के लिए देसी-विदेशी पर्यटक आते हैं। अलबर्ट हॉल का इतिहास करीबन 150 साल प्राचीन माना जाता है। इस संग्रहालय की नींव 6 फरवरी 1876 को प्रिंसऑफ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड की जयपुर यात्रा के दौरान रखी गई थी। इस स्मारक का उपयोग किस तरह से किया जाए, इस बारे में कोई निश्चित लाइन नहीं थी। 1880 में महाराजा माधोसिंह द्वितीय के कहने पर अस्थाई संग्राहलय का निर्माण कराया गया था।

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अल्बर्ट हॉल के निर्माण को साल 1887 में जयपुर पीडब्ल्यूडी के निदेशक सैमुअल स्विंटन जैकब ने पूरा कराया। वास्तुशैली का यह अल्बर्ट हॉल संग्रहालय पर्यटकों को अपनी ओर खींच लाता है। संग्रहालय की गलियारों में तरह-तरह शैलियों में चित्रों के साथ शुशोभित है। संग्राहलय में यूरोपीय, ग्रीक,मिस्र, चीनी और बेबीलोनियन सभ्यताओं को भी चित्रित किया गया है। संग्राहलय की कालीन गैलेरी विश्व की फारसी उध्यान कालिनों का सबसे अच्छा उदाहरण है जिसको 1632 में मिर्जा राजा जयसिंह के समय में फारसी उध्यान के नजारे को दिखाया गया है। कालीन गैलरी को चार भागों में विभाजित किया गया है।

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