Jaipur Jantar Mantar: जानिए जयपुर के जंतर मंतर की पूरी कहानी, जो हमें देता है ये खास जानकारी

Jaipur Jantar Mantar: जयपुर के प्रमुख आकर्षणों में से एक जंतर मंतर पर्यटकों का ध्यान खींचता नजर आता है। गुलाबी नगरी के सिटी पैलेस और हवामहल के पास स्थित जतंर मंतर शहर के खास पर्यटक स्थलों में से एक हैं। यूनेस्को द्वारा प्रमाणित जगह जयपुर का जंतर मंतर यूनेस्को की वैश्विक धरोहर की सूची में शामिल है। पिंकसिटी की धरोहर जंतर मंतर राजा सवाई जयसिंह की ओर से निर्मित कराए गए 5 वेधशालाओं में से एक हैं। अन्य वेधशालाएं दिल्ली, वाराणसी,मथुरा और उज्जेन में स्थित है। जंतर मंतर का निर्माण 1728 के आरंभिक कालावधि में किया गया था। 20वीं सदी के अंत में इसका पुनरुद्धार किया गया। जंतर मंतर के यंत्रों के निर्माण में पत्थर, संगमरमर एवं पीतर का उपयोग किया गया है।

राजा जयसिंह ने समरकंद के तत्कालीन शासक उलूग बेग के हाथों बनाई गई वेधशाला से प्रेरणा ली और भारत में वेधशालओं का निर्माण कराया गया। पहली वेधशाला 1724 में दिल्ली में बनी। इसके 10 साल बाद जयपुर में जंतर मंतर का निर्माण किया गया।इसके 15 साल बाद मुथरा, उज्जैन और बनारस में भी ऐसी ही वेधसालाएं बनाई गईं। लेकिन इनमें सबसे बड़ी और विशाल जयपुर की वेध शाला ही है। इसका रखरखाव भी दूसरों से बेहतर तरीके से हो रहा है। राजा जय सिंह के हाथों जंतर मंतर में खड़े किए गए यंत्रों में सम्राट, जयप्रकाश औ राम यंत्र मौजूद है। इसमें सम्राट सबसे ऊंचा है।

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 जंतर मंतर में बने ये यंत्र चूने और पत्थर से बने हुए हैं। ये आज भी ना केवल सलामत हैं बल्कि ज्योतिषी आज भी हर साल इन यंत्रों के माध्यम से वर्षा की थाह लेते हैं और मौसम के बारे में जानकारी देते हैं। जंतर मंतर का सम्राट यंत्र कोई 144 फिट ऊंचा है। इस यंत्र की ऊंची चोटी आकाशीय ध्रुव को इंगित करती है। इसकी दीवार पर समय बताने के निशान है जिससे आज भी घंटे, मिनट और चौथाई मिनट को पढ़ा जा सकता है।

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