कुमाऊं में सूखे की मार, पहाड़ों में फसल संकट गहराया: 100 दिन से नहीं बरसे बादल

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कुमाऊं के पर्वतीय इलाकों में बारिश नहीं होने से सूखती रबी फसलें

बारिश नहीं हुई तो 15 दिन में 40% तक रबी फसल बर्बाद होने का खतरा

कुमाऊं मंडल के पर्वतीय जिलों में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। पिछले 100 दिनों से अधिक समय से न तो बारिश हुई है और न ही बर्फबारी। इसके चलते खेतों में खड़ी रबी फसलें सूखने लगी हैं। किसानों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सबसे पहले खेती के आंकड़ों पर नजर डालें। कुमाऊं मंडल के छह जिलों में इस वर्ष 207,512 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई की गई है। इसमें गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर और तिलहन जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं। हालांकि, वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में हालात बेहद खराब हैं।

पर्वतीय जिलों में फसलों पर सबसे ज्यादा असर

नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे पर्वतीय जिलों में सिंचाई के साधन सीमित हैं।
इसी कारण यहां सूखे का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। प्रारंभिक सर्वे के अनुसार अब तक 15 से 20 प्रतिशत तक फसल को नुकसान हो चुका है। कृषि विभाग के मुताबिक गेहूं की खेती 169,156 हेक्टेयर में की गई है। वहीं, मसूर 8,835 हेक्टेयर और तिलहन 15,963 हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है। बारिश की कमी से इन फसलों का जमाव और फुटाव प्रभावित हुआ है।

किसानों की बढ़ी चिंता

पिथौरागढ़ की महिला किसान जया बताती हैं कि उन्होंने गेहूं और मसूर की फसल बोई थी।
बारिश नहीं होने के कारण दोनों फसलें सूख गई हैं। उन्होंने सरकार से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।

15 दिन में हालात और बिगड़ सकते हैं

कृषि विभाग कुमाऊं मंडल के संयुक्त निदेशक पीके सिंह ने बताया कि यदि अगले 10 से 15 दिनों में बारिश नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में पर्वतीय क्षेत्रों में 40 प्रतिशत तक फसल खराब होने की आशंका है। हालांकि, ऊधम सिंह नगर जिले में सिंचाई सुविधा के कारण सूखे का असर कम है।

📝 सर्वे और मुआवजे की तैयारी

कृषि विभाग ने नुकसान के आकलन के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। सर्वे के आधार पर किसानों को फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

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