Delhi bill: मोदी सरकार ने केजरीवाल पर लगाई लगाम ?, जाने नए बिल से कैसे चलाई अधिकारों पर कैंची

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार संशोधन विधेयक पारित होने के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार में अधिकारों की जंग शुरू गई है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ फैसले के बाद शानदार जीत मिली थी। इसके चलते इस लड़ाई पर रोक लग गई थी। अब नए विधेयक को लेकर केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है।

विधेयक में क्या है जिसेस उपराज्यपाल के अधिकार बढ़ जाएंगे और दिल्ली के मुख्यमंत्री की ताकत कम होगी। दिल्ली में अधिकार मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच जंग हमेशा से चर्चाओं रही है। दिल्ली में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री और एलजी के बीच विवादों का पिटारा खुलना शुरू हो गया। हालात यहां तक बिगड़ गए कि अधिकारों की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक जा पहुंची। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार की भूमिका और अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट किया है। अब तस्वीर साफ करने के लिए  गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली एक्ट में संशोधन लाई।

विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली में सरकार का मतलब उप राज्यपाल है। इसके कानून बनने पर दिल्ली सरकार के लिए किसी भी कार्यकारी फैसले से पहले उपराज्यपाल की राय लेना होगा।दिल्ली सरकार को विधायी प्रस्ताव 15 दिन पहले और प्रशासनिक प्रस्ताव को 7 दिन पहले उपराज्यपाल को भिजवाना होगा। उपराज्यपाल यदि सहमत नहीं हुए तो वह अंतिम निर्णय के लिए उस प्रस्ताव को राष्ट्रपति को भी भेज सकेंगे।  

खबरों से अपडेट रहने के लिए BADHTI KALAM APP DOWNLOAD LINK: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.badhtikalam.badhtikalam&hl=en&gl=US