गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे 15 विपक्षी दलों के नेताओं को पुलिस ने रोका, नहीं हुई किसानें से मुलाकात

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को 71 दिन हो गए हैं। हालांकि, किसानों की सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी है। 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद दम तोड़ते आंदोलन को राकेश टिकैत के आंसुओं ने फिर खड़ा किया है। इसके बाद से गाजीपुर, सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हो रहे हैं।
गुरुवार को 8 विपक्षी दलों के नेता किसानों से मिलने गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। इससे पहले ही विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने रोक लिया। पुलिस ने नेताओं को किसानों से नहीं मिलने दिया। इसके बाद विपक्षी दलों के नेताओं को वापस लौटना पड़ा। विपक्षी दलों के नेताओं को पुलिस वहां से दूसरी जगह लेकर गई। विपक्षी दलों के नेताओं में टीएमसी नेता सौगात रॉय, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, डीएमके की एम कनिमोई भी शामिल हैं।
सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि यहां इसलिए पहुंचे हैं ताकि हम इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कर सकें। हरसिमरत ने कहा कि स्पीकर हमें इस मुद्दे को उठाने नहीं दे रहे। अब सभी पक्ष इस बात का विवरण देंगे कि यहां क्या हो रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि वह इस मुद्दे पर लोकसभा स्पीकर को रिपोर्ट देंगे। किसानों की बुधवार को हरियाणा के जिंद में महापंचायत हुई। जींद पंचायत में गाजीपुर बॉर्डर से किसान नेता राकेश टिकैत भी पहुंचे। लाखों की संख्या में किसानों ने जुटकर राकेश टिकैत का समर्थन किया और कृषि कानूनों के खिलाफ जमकर विरोध किया।