Railway Privatisation Updates: प्राइवेट हो सकती हैं 150 यात्री ट्रेनें, 2.5 लाख करोड़ जुटाने का प्लान…

केंद्र सरकार ने पिछले महीने पेश किए गए बजट में पहली बार संपत्ति के मुद्रीकरण की योजना को पेश किया था। अब सरकार इस योजना को अमल में लाकर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 8 मंत्रालयों ने अपनी उन संपत्तियों का ब्योरा रखा है जिन्हें भविष्य में बेचने की तैयारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर सेक्टर की ज्यादातर संपत्तियों के साथ-साथ 150 से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनों के संचालन का जिम्मा प्राइवेट कंपनियों के दिया जा सकता है।

केंद्र सरकारक दिल्ली, बेंगलुरू, मुंबई और हैदराबाद एयरपोर्ट में अपनी बची हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। दिल्ली में मौजूद जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे मैदानों को लीज पर दिए जाने का प्लान भी तैयार किया गया है। इस साल के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी संपत्तियों को बेचकर पैसे जुटाने का ऐलान किया था। यह उसके महत्वाकांक्षी 205 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया इन चार एयरपोर्ट में बाकी बची हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इसके साथ ही 13 अन्य एयरपोर्ट को वित्त वर्ष 2021-22 में निजीकरण के लिए पहचाना गया है।

लोकसभा में साल 2021-22 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि कई सांसद निजीकरण का आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे भारत की संपत्ति है। भारतीय रेलवे का कभी निजीकरण नहीं होगा।सोमवार को चर्चा के दौरान कांग्रेस के जसबीर सिंह गिल सहित कुछ अन्य सदस्यों ने रेलेव का निजीकरण करने को लेकर टिप्पणी की थी।