Shaheed Diwas 2021 India: भगत सिंह के ये 10 क्रांतिकारी विचार, जो भर देंगे देशभक्ती का जज्बा

भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आदाज कराने के लिए कई वीर सपूतों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके इस त्याग के कारण ही देश अंग्रेजों की जंजीरों से आजाद हो सका। 23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह को सुखदेव  और राजगुरु के साथ लाहौर षडयंत्र के आरोप में अंग्रेजी सरकार ने फांसी पर लटकाया था। 23 मार्च की तारीख उस दिन से हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। इसके बाद से 23 मार्च को देशभर में Shaheed Diwas 2021 के रूप में मनाया जाने लगा।  

भगत सिंह ने अपने अपने जीवन में वैचारिक क्रांति की जो मशाल जलाई है उनके बाद अब किसी के लिए संभन नही होगी। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारी वीरों ने देश के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्यौछावर कर गए। भगत सिंह ने केंद्रीय असेंम्बली में एक खाली स्थान पर बम फेंके।  इसके बाद उन्होंने खुद गिरफ्तारी देकर दुनिया के सामने मसाल पेश की।

Read more…

IAS Nidhi Nivedita: महिला कलेक्टर ने BJP कार्यकर्ता को जड़ा था थप्पड़, जानिए IAS निधि निवेदिता की कहानी

बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, यो दोनों दोनों क्रांतिकारी सोच के लक्षण है।

राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में आजाद है।

निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांति वे मुझे कत्ल कर सकते हैं मेरे विचारों को नहीं। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं लेकिन मेरे जज्बे को नहीं।

प्रेमी पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं और लोग अक्सर देशभक्तों को पागल कहते हैं।   क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण है।

अगर बहरों को अपनी बात सुनानी है तो आवाज को जोरदार होना होगा। जब हमने बम फेंका तो हमारा मकसद किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी हुकुमत को भारत छोड़ो का संदेश देने के उद्देश्य से बम गिराया था।

खबरों से अपडेट रहने के लिए BADHTI KALAM APP DOWNLOAD LINK: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.badhtikalam.badhtikalam&hl=en&gl=US