Smriti Van Full Info: स्मृति वन में ऐसा क्या है जहां लोगों का हमेशा रहता है जमावडा

जयपुर शहर की कला एवं संस्कृति पर्यटकों को अपनी ओर खिंच लाती है। यहां के हरे-भरे पार्कों में बैठकर पर्यटक अपनी थकान दूर करते हैं। हरियाली से युक्त पार्कों में चलने वाली ठंडी हवा रोम-रोम को छू जाती है। कुछ इसी तरह से आज हम आपको स्मृति वन से रूबरू करवाएंगे,जहां पर लोगों को जमघट लगा रहता है। जयपुर के जेएलएन मार्ग के पास स्मृति वन शहर का सबसे जैव विविधता वाला वन है।

स्मृति की कब से हुई शुरूआत

साल 191 में आई बाढ़ के समय इस स्थान पर एक गहरा गड्ढा बन गया है। उसके कुछ वक्त बाद स्थानीय विवासी इस स्थान पर अपने प्रियजनों की स्मृति में वृक्षारोपण करने लगे। इस वजह से इस स्थान की जैविक विविधता ओर बढ़ गई। इस वन क्षेत्र का नाम स्मृति वन पड़ गया। कुछ समय बाद राजस्थान सरकार ने इस वन क्षेत्र को ग्रीन रास्थान योजना के तहत वृक्षारोपण करके विकसित करने का काम शुरू किया। इस स्थान को स्मृति वन के नाम से पहचाना जाने लगा। स्मृति वन का निर्माण कार्य 8 अक्टूबर 2005 को राजस्थान सरकार ने शुरू किया। 8 दिसंबर 2007 को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। स्मृति वन में सुबह के वक्त स्थानीय लोग मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं।

कपल्स के लिए घूमने का है बेस्ट स्थान  

स्मृति वन में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के घूमने के लिहाज से ट्रेक बनाए गए हैं। इस वन क्षेत्र में कपल्स ज्यादा घूमने के लिहाज से आते हैं। स्मृति बन कुल 40 एकड़ में फैला हुआ है। पूरे स्मृति वन को 11 खंडों में बांटा गया है। इन सभी खंडों का पेड़-पौधों की विशेषता के अनुरूप नामकरण किया गया है।

11 खंडों में बंटे स्मृति वन के कुछ विशेष नाम

वसुंधरा वन आकर्षण का केंद्र है। इसमें कई तरह का वृक्षारोपण किया गया है। मोगरा, चंपा, अल्मोड़ा, कोरल और कई पेड़ इस वन की खूबसूरती बने हुए हैं।

धन्वंतरि वन स्मृति वन का सबसे बड़ा खंड है। इसमें 250 तरह के के हर्बल औषधीय पौधे लगाए गए हैं।

चम्पा वन गैलरी में 108 तरह के फूलों के पौधे लगाए गए हैं जो जो सुगंधित और जीवंतता का अनुभव कराते हैं।

अरावली वन में विशेष तरह से पौधारोपण किया गया है। जिनका औषधीय और आयुर्वेदिक में काफी महत्व है। जैसे हवन, रोहिड़ा, गुगल, सलार, खेजड़ी, ढाक, धवड़ा आदि।

जावा कुसुम वन क्षेत्र को सजाने के लिए देश भर से पौधों को लाया जाता है। यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए आंख की तरह है।

मरू वन क्षेत्र में ऐसे पौधे लगे हुए हैं जो निर्जन क्षेत्र में पाए जाते हैं। 64 तरह के जेरोफाइट्स पौधे जैसे कैक्टस, एगेव, यूफोरबिया लगे हुए हैं।

राष्ट्रीय वन खंड में बोगनविलिया, अल्मोंडा, सदा बहार जैसे फूलों के पेड़ लगे हुए हैं।

नर्सरी का निर्माण पौधों की गुणवत्ता और देखभाल पर विशेष ध्यान रखने के लिए किया जाता है।

सरोवर-पानी के भंडारण के लिए पांच फीट का जलाशय बनाया गया है। तालाब में बतख और मछलियों को देखा जा सकता है। सर्दियों के वक्त अप्रवासी पक्षी इस जगह पर आकर वन क्षेत्र की शान बढ़ाते हैं।

संग्रहालय-पर्यटकों को आगे गाइड करने के लिए इस क्षेत्र में पक्षियों और फूलों की तस्वीरों की जानकारी मिलती है।

वृंदावन वन-इस क्षेत्र में जल निकासी की लाइन और जल संयंत्रों का स्थिरीकरण है।

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स्मृति वन को देखने का समय-

सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक

प्रवेश प्रवेश शुल्क- नि:शुल्क

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