Tata Mistry Case: क्या है टाटा-मिस्त्री विवाद? TATA घराने के संकट का जानें पूरा घटनाक्रम

देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने पर सुप्रीम कोर्ट का आज फैसला आया है। शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने एनसीएलटी के 18 दिसंबर 2019 के उस फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें सायरस मिस्त्री को टाटा समूह का दोबारा कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने टाटा संस के हक में फैसला सुनाया। इस तरह 100 अरब डॉलर वाले इस समूह ने सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जीत ली।

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साइरस मिस्त्री ने टाटा संक के पद से अचानक हटाए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई का सहारा लिया था। एनसीएलटी ने अपने आदेश में 100 अरब डॉलर के टाटा समूह में साइरस मिस्त्री को कार्यकारी चेयरमैन पद पर बहाल किया था। टाटा समूह और मिस्त्री के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। 28 दिसंबर 2012 को साइरस मिस्त्री को टाटा का चेयरमैन बनाया था। मिस्त्री ने छठे चेयरमैन के पद पर ग्रुप की कमान संभाली लेकिन 2016 में मिस्त्री को पद से हटा दिया गया था।

मिस्त्री को पद से हटाने पर टाटा ग्रुप का कहना था कि ग्रुप के बेहतरी के लिए यह बदलाव जरूरी था। अचानक चेयरमैन पद से हटाने जाने पर मिस्त्री ने टाटा संस के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण में गए। इसके बाद मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण में पहुंचा और फैसला साइरस के पक्ष में आया। टाटा ग्रुप ने इस फैसले के खिलाफ सु्प्रीम कोर्ट गए थे। अब कोर्ट का इस पर फैसला आया है।

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