Myanmar Violence पर भारत की चुप्पी के पीछे आखिर क्या है मजबूरी?

म्यांमार में सैन्य प्रशासन के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों और अब तक 400 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत पर अमेरिका सहित कई देशों ने आलोचना की है। लेकिन ऐसा लगता है कि Myanmar violence में भारत सरकार अब तक खामोश बनी हुई है। म्यांमार में शनिवार को सेना की कार्रवाई पर औपचारिक रूप से अब तक भारत चुप्पी साधे हुए है।

सैन्य तख्तापलट के बाद से प्रतिक्रियाएं तो आईं लेकिन वो कमजोर आवाज में रही। Myanmar violence पर भारत की इस खामोशी की वजह क्या हो सकती है? म्यांमार से जुड़े मामलों के जानकार राजीव भाटिया कहते हैं कि म्यांमार भारत का पड़ोसी देश है। इसके चलते ये दुविधा बढ़ जाती है। राजीव कहते हैं कि हजारों मील दूर अमेरिका जिस तरह से प्रतिक्रिया दे सकता है,एक पड़ोसी मुल्क नहीं कर सकता।

Read More….

New Financial Year: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे ये नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा असर

खुद भारत में सरकार की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि भारत उन आठ देशों में क्यों शामिल हुआ। जिन्होंने 27 मार्च को नेपीडाव में म्यांमार सशस्त्र सेना दिवस सैन्य परेड में भाग लिया था। यह आयोजन उस दिन हुआ जब सैनिकों की गोलियों से करीब 100 नागरिकों की मौत हो गई।  आयोजन में शामिल होने वाले भारत के प्रतिनिधि के अलावा चीन, पाकिस्तान और रूस भी शामिल था। पहले माना जाता था कि म्यांमार सेना शरणार्थियों को रोकने में मदद कर रही है। हालांकि मंगलवार को, अराकान सेना ने दो अन्य सशस्त्र जातीय समूहों में शामिल होकर म्यांमार की सेना को प्रदर्शनकारियों को मारने से रोकने के लिए कहा।  

खबरों से अपडेट रहने के लिए BADHTI KALAM APP DOWNLOAD LINK: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.badhtikalam.badhtikalam&hl=en&gl=US