Coronavirus के बीच सरकारी सिस्टम का शिकार हो रहे मरीज, अपनों का दर्द बंया करती ये खबर

कोरोना महामारी का प्रकोप चारों तरफ तबाही मचा रखा है। अपनों के खोलने का दर्द उन परिजनों को सता रहा है। लेकिन अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई है। सरकारी सिस्टम की लापरवपाही का शिकार लोगो को उठाना पड़ रहा है। ऑक्सीजन और बेड की कमी से लाचार मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। एक पल तो वह अजनबी थे, जिनमें से कोई भी एक दूसरों को जानता तक नहीं था। ओम दत्त शर्मा,पार्वती देवी,और दीपक शुक्रवार दोपहर को जीटीबी अस्पताल के बाहर लेट गए, ऑक्सीजन का एक सिलेंडर मिल कर साझा किया क्योंकि कोई भी स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं थे।

ओम दत्त के परिवार वालो ने कहा की वे उस खाली जगह के किसी अन्य मरीज को नहीं खोना चाहते थे। गुरुवार की रात को ओम दत्त के 40 वर्षीय पुत्र चमन लाल शर्मा की उसी अस्पताल के बाहर मौत हो गई, जब इमरजेंसी ब्लॉक के पास एक बिस्तर का इंतज़ार कर रहे थे। उन्होंने हालांकि एक स्ट्रेचर पाया तो था। शुक्रवार को, तीन परिवारों के सदस्य अपने मरीजों के आसपास खड़े रहे थे, समय-समय पर ऑक्सीजन मास्क और कनेक्टिंग पाइप को समायोजित कर रहे थे, क्योंकि वे अस्पताल के covid -19 के ब्लॉक में भर्ती होने का इंतजार करते थे। अस्पताल के परिचारकों और डॉक्टरों ने वह किया जो वे कर सकते थे। आक्सीमीटर से हर घंटे उन पर जाँच करना।

पार्वती के बेटे राम कुमार ने कहा कि उसकी मां को कुछ दिनों से खांसी और बुखार है और उन्होंने कहा कि वह अपनी मां और बड़े भाई के साथ  दिल्ली के मंडावली में अपने घर से शुक्रवार की सुबह 3 बजे से अस्पताल में बिस्तर की तलाश के लिए निकल गए थे। हम शांति मुक्त और मैक्स भी गए लेकिन एक बिस्तर भी नहीं मिला।