एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी के हस्तांतरण पर केंद्रित होगा।
नई दिल्ली/येरूशलम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दौरान भारत और इजरायल के बीच उन्नत रक्षा तकनीक समझौते पर बातचीत की संभावना है। यह समझौता सीधे हथियारों की बिक्री से नहीं, बल्कि एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी के हस्तांतरण पर केंद्रित होगा।
पीएम मोदी का संदेश और रक्षा सहयोग
इजरायली संसद कनेस्सेट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत और इजरायल जैसे भरोसेमंद साझेदारों का मजबूत रक्षा सहयोग जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत चाहता है कि हथियारों के साथ-साथ तकनीक का उत्पादन भारत में हो सके, ताकि सुरक्षा में आत्मनिर्भरता बढ़े।
दो हिस्सों में हो सकता है समझौता
जानकारी के अनुसार नया रक्षा समझौता दो हिस्सों में हो सकता है:
- एयर डिफेंस सिस्टम:
- इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज का एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम
- राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स का डेविड्स स्लिंग और आयरन डोम
- राफेल और एल्बिट सिस्टम्स का आयरन बीम सिस्टम, जो लेजर तकनीक से लगभग 10 किलोमीटर तक के हवाई खतरों को खत्म कर सकता है
- उन्नत मिसाइल और हथियार प्रणाली:
- राफेल की SPICE-1000 गाइडेंस किट
- एल्बिट सिस्टम्स की रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल
- आइस ब्रेकर नौसैनिक क्रूज मिसाइल
- आईएआई की सुपरसोनिक एयर LORA मिसाइल
भारत की रणनीति और सुरक्षा तैयारी
भारत पिछले साल पाकिस्तान के साथ तनाव और सीमा सुरक्षा में सबक लेने के बाद अपनी रक्षा प्रणाली को और मजबूत करना चाहता है। इसके तहत पहले से मौजूद हथियार प्रणालियों जैसे रूस की S-400, इजरायल की बराक प्रणाली और स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम के साथ इस समझौते से सुरक्षा कवच और भी मजबूत होगा। यह समझौता न केवल भारत की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा, बल्कि एडवांस्ड तकनीक हस्तांतरण से देश की रक्षा क्षमता में नई मजबूती भी लाएगा।
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