EVM पर सवालों के बीच नया राजनीतिक मोड़
देश में बैलेट पेपर बनाम EVM की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लंबे समय से EVM की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi भी कई बार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर चुके हैं। इसी बीच Karnataka की Karnataka Cabinet ने आगामी पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से कराने को मंजूरी दी। लेकिन इस फैसले के बाद अब झारखंड के निकाय चुनाव के नतीजों ने नई बहस छेड़ दी है।
झारखंड रिजल्ट से बदला नैरेटिव
Jharkhand के नगर निकाय चुनाव भले ही गैर-दलीय थे, लेकिन राजनीतिक दलों के समर्थन से उम्मीदवार मैदान में थे। 48 सीटों में भाजपा समर्थित 12 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। वहीं कांग्रेस समर्थित केवल 2 प्रत्याशी जीत सके। इन नतीजों ने उस दावे को चुनौती दी है जिसमें EVM को भाजपा की जीत का मुख्य कारण बताया जाता रहा है। बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा।
क्या बदलेगा कर्नाटक का फैसला?
Siddaramaiah सरकार ने पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से कराने का फैसला EVM को लेकर उठ रहे सवालों के बीच लिया था। ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री Priyank Kharge ने जानकारी दी कि कर्नाटक ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक 2026 बजट सत्र में पेश किया जाएगा। हालांकि कांग्रेस के भीतर ही इस फैसले को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। अब झारखंड के नतीजों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या कर्नाटक सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी।
सियासी बहस तेज
झारखंड के नतीजों ने Ballot Paper vs EVM Debate को नया मोड़ दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार अपने फैसले पर कायम रहती है या राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए कोई नया रुख अपनाती है।
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