ओडिशा तट से हुए सफल परीक्षण ने दिखाया भारत का ब्रह्मास्त्र, 3500 KM रेंज में दुश्मनों की नींद उड़ी
ओडिशा तट से हुआ शक्ति प्रदर्शन
शुक्रवार सुबह भारत ने ऐसा सामरिक परीक्षण किया, जिसकी गूंज सिर्फ बंगाल की खाड़ी तक सीमित नहीं रही। जैसे ही अग्नि-3 मिसाइल ने आसमान चीरते हुए उड़ान भरी, यह साफ हो गया कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड ने इस इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। लॉन्च के दौरान सभी तकनीकी और ऑपरेशनल पैरामीटर्स पूरी तरह सटीक पाए गए।
चीन-पाक तक पहुंचा रणनीतिक संदेश
इस परीक्षण के बाद बीजिंग और रावलपिंडी में हलचल मच गई। अग्नि-3 की रेंज इतनी व्यापक है कि पाकिस्तान का लगभग हर हिस्सा इसकी जद में आता है। वहीं, चीन के कई बड़े और रणनीतिक शहर भी इसकी पहुंच से बाहर नहीं हैं। यही वजह है कि इसे सिर्फ एक मिसाइल टेस्ट नहीं, बल्कि भारत का स्ट्रेटेजिक मैसेज माना जा रहा है।
अग्नि-3 क्यों है इतनी खतरनाक
अग्नि-3 दो-चरण की ठोस ईंधन से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। पहला स्टेज मिसाइल को ऊंचाई तक ले जाता है। इसके बाद दूसरा स्टेज सक्रिय होकर इसे लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ाता है। इससे इसकी स्थिरता और सटीकता काफी बढ़ जाती है। यह मिसाइल पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के वॉरहेड ले जाने में सक्षम है।
रेंज, रफ्तार और सटीकता
अग्नि-3 की अधिकतम रेंज लगभग 3500 किलोमीटर है। अभी तक इसके 3000 से 3200 किलोमीटर रेंज में सफल परीक्षण किए जा चुके हैं। इसकी लंबाई करीब 17 मीटर है और वजन लगभग 48 से 50 टन बताया जाता है। यह मिसाइल मैक 7 से 8 की रफ्तार से उड़ान भर सकती है। वहीं, इसकी सटीकता इतनी जबरदस्त है कि लक्ष्य से चूक की संभावना 40 मीटर से भी कम मानी जाती है।
भारत की रक्षा नीति का मजबूत स्तंभ
हाल के वर्षों में भारत ने अग्नि-4 और अग्नि-5 जैसी उन्नत मिसाइलों का भी सफल परीक्षण किया है। इसके बावजूद अग्नि-3 का रणनीतिक महत्व अलग है। यह मिसाइल भारत की न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय प्रतिरोध नीति का मजबूत आधार है। यह साफ संकेत देती है कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
