अमीर देशों को ज्यादा फायदा, महिलाओं और युवाओं पर ज्यादा असर
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) अब सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है। यह कारोबार, नौकरियों और समाज की संरचना को बदल रहा है। Boston Consulting Group और Moloco की रिपोर्ट बताती है कि न्यूज, ट्रेवल और शिक्षा जैसे सेक्टरों पर एआई का बड़ा असर पड़ेगा। क्योंकि ChatGPT जैसे टूल अब सीधे ग्राहक और ब्रांड के बीच आ चुके हैं।
उत्पादकता बढ़ेगी, लेकिन सबको बराबर फायदा नहीं
Moody’s की रिपोर्ट के अनुसार, एआई से वैश्विक उत्पादकता में सालाना औसतन 1.5% की बढ़ोतरी हो सकती है।हालांकि, यह फायदा समान रूप से नहीं बंटेगा। अमीर देश तकनीकी ढांचे और निवेश की वजह से ज्यादा लाभ उठाएंगे।
- अमीर देशों में:
- 30% जॉब बेहतर होंगी
- 30% जॉब एआई से रिप्लेस हो सकती हैं
- 40% पर कम खतरा
- विकासशील देशों में:
- 16% जॉब बेहतर होंगी
- 24% रिप्लेस हो सकती हैं
- 60% पर कम खतरा
एंट्री लेवल जॉब सबसे पहले प्रभावित
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि हर साल 5% से ज्यादा ऑटोमेशन हुआ, तो 10-20% तक नौकरियां जा सकती हैं।
इससे बेरोजगारी बढ़ सकती है। सरकारों पर सामाजिक सुरक्षा का बोझ बढ़ेगा।
किन्हें होगा नुकसान?
महिलाएं:
क्लर्क, प्रशासनिक और टीचिंग जैसी भूमिकाओं में महिलाओं की संख्या अधिक है। एआई इन कार्यों को जल्दी ऑटोमेट कर सकता है।
युवा और नए ग्रेजुएट:
एंट्री लेवल जॉब सबसे पहले खत्म होंगी। अमेरिका में यह ट्रेंड दिखने लगा है।
55+ उम्र के कर्मचारी:
नई तकनीक सीखना कठिन हो सकता है। नौकरी जाने पर दोबारा अवसर पाना मुश्किल होगा।
किन्हें होगा फायदा?
30-50 उम्र के पेशेवर:
इनके पास अनुभव और स्किल दोनों हैं। एआई इनके काम को बेहतर बनाएगा, पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं करेगा।
ज्यादा पढ़े-लिखे और STEM क्षेत्र के लोग:
आईटी, इंजीनियरिंग और डेटा साइंस से जुड़े पेशेवरों को एआई से ज्यादा अवसर मिलेंगे।
अमीर और निवेशक वर्ग:
इनकी आमदनी काम से ज्यादा निवेश से होती है। एआई कंपनियों के बढ़ते मुनाफे का सीधा लाभ इन्हें मिलेगा।
निष्कर्ष
एआई अवसर भी है और चुनौती भी। एंट्री लेवल जॉब पर खतरा बढ़ रहा है। लेकिन स्किल अपग्रेड और तकनीक अपनाने से नए अवसर भी बन सकते हैं। भविष्य उन्हीं का होगा जो एआई के साथ खुद को ढाल लेंगे।
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