असदुद्दीन ओवैसी के फैसले ने दलित हिंदू नेता को दिलाई ऐतिहासिक जीत, पहचान की राजनीति पर भारी पड़ा काम
BMC चुनाव में बदला राजनीतिक संदेश
बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव इस बार कई मायनों में अलग रहे। चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक बयानबाजी भी देखने को मिली। लेकिन नतीजों ने एक स्पष्ट संदेश दिया। जमीन पर किया गया काम ज्यादा प्रभावी साबित हुआ। साथ ही सामाजिक मुद्दों ने पहचान की राजनीति को पीछे छोड़ दिया।
गोवंडी से उभरे विजय उबाले
मुंबई के गोवंडी इलाके से विजय उबाले ने चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया। वह AIMIM के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे। उनकी उम्र सिर्फ 33 वर्ष है। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। कुल संपत्ति महज 1.5 लाख रुपये है। उनके नाम कोई निजी मकान भी दर्ज नहीं है।
ओवैसी का फैसला बना निर्णायक
असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM ने बड़ा कदम उठाया। पार्टी ने एक दलित हिंदू उम्मीदवार पर भरोसा जताया। आमतौर पर AIMIM को मुस्लिम राजनीति तक सीमित माना जाता है। लेकिन इस फैसले ने उस सोच को तोड़ दिया। विजय उबाले ने पार्टी के भरोसे को जीत में बदल दिया।
मजबूत उम्मीदवारों को दी शिकस्त
विजय उबाले ने 1,523 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने शिवसेना की सोनाली जाधव को हराया। इसके अलावा शिवसेना (UBT) के सिद्धार्थ उस्तुरे को भी पीछे छोड़ा। यह सीट 2017 में एनसीपी के पास थी।
प्रचार में अपनाई अलग राह
विजय उबाले 2022 से AIMIM के स्थानीय पदाधिकारी रहे हैं। प्रचार के दौरान उन्होंने धर्म या भाषा को मुद्दा नहीं बनाया। उन्होंने संविधान और सामाजिक न्याय की बात की। यही रणनीति मतदाताओं को पसंद आई।
अन्य दलों का प्रदर्शन
इस चुनाव में शिवसेना के दोनों धड़ों ने अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे। शिवसेना (UBT) के दो मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में सफल रहे। वहीं शिंदे गुट को सफलता नहीं मिली। कई सीटों पर कड़ा मुकाबला जरूर देखने को मिला।
AIMIM की बदली हुई छवि
इन नतीजों से AIMIM की राजनीति में बदलाव साफ दिखा। पार्टी अब सिर्फ पहचान की राजनीति तक सीमित नहीं दिखी। दलित और वंचित वर्गों में पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ी। मीम-भीम और सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा मिली। विजय उबाले की जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं है। यह मुंबई की राजनीति के लिए बड़ा संकेत है। आने वाले समय में काम और भरोसे की राजनीति और मजबूत हो सकती है।
