शराब बॉडी में कितनी जल्दी फैलती है? AIIMS के डॉक्टर ने बताया चौंकाने वाला सच

Alcohol absorption process in human body
शराब पीने के बाद शरीर और दिमाग पर पड़ने वाले असर को समझाते डॉक्टर

सिर्फ कुछ मिनटों में शराब दिमाग तक पहुंच जाती है और इसका असर पूरे शरीर पर दिखाई देने लगता है।

शराब पीने के कितने समय में शरीर में असर दिखता है

शराब का सेवन करने के बाद इसका असर बहुत तेजी से शुरू हो जाता है। AIIMS के वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार, शराब पीने के सिर्फ 2 से 5 मिनट के भीतर यह रक्त में पहुंचने लगती है। इसके बाद कुछ ही मिनटों में यह मस्तिष्क तक पहुंच जाती है। यही कारण है कि कई लोगों को 10 मिनट के अंदर हल्का नशा महसूस होने लगता है। धीरे-धीरे शराब पूरे शरीर में फैलती है और 30 से 90 मिनट के भीतर इसका अधिकतम प्रभाव दिखाई देता है।

शराब शरीर में कैसे फैलती है

शराब सबसे पहले पेट और छोटी आंत से अवशोषित होती है। इसके बाद यह सीधे रक्त प्रवाह में चली जाती है। चूंकि रक्त पूरे शरीर में लगभग 90 सेकंड में घूम जाता है, इसलिए शराब बहुत तेजी से दिमाग, दिल, लिवर और अन्य अंगों तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि शराब का असर बाकी पेय पदार्थों की तुलना में कहीं ज्यादा जल्दी महसूस होता है।

कितनी देर में पूरी शराब शरीर में फैल जाती है

डॉक्टरों के मुताबिक, शराब पीने के 30 मिनट के भीतर लगभग 60 से 70 प्रतिशत शराब रक्त में पहुंच चुकी होती है। वहीं 1 से 1.5 घंटे में शराब लगभग पूरे शरीर में फैल जाती है। इसी समय व्यक्ति का संतुलन बिगड़ना, बोलने में लड़खड़ाहट और सोचने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

शराब का असर जल्दी या देर से क्यों होता है

हर व्यक्ति पर शराब का असर एक जैसा नहीं होता। खाली पेट शराब पीने से इसका असर तेजी से होता है। वहीं खाने के साथ शराब पीने पर यह धीरे असर करती है। इसके अलावा सोडा या कोला जैसी कार्बोनेटेड ड्रिंक के साथ शराब पीने से नशा जल्दी चढ़ता है। शरीर का वजन, उम्र और लिंग भी असर को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में शराब का असर पुरुषों की तुलना में जल्दी दिखाई देता है।

दिमाग पर शराब का असर सबसे पहले क्यों होता है

दिमाग में रक्त का प्रवाह बहुत अधिक होता है और शराब पानी में आसानी से घुल जाती है। यही कारण है कि पीने के 2 से 10 मिनट के भीतर नशा महसूस होने लगता है। लंबे समय तक शराब का सेवन मानसिक स्वास्थ्य, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।

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