नाहरगढ़ सेंचुरी से सटे इलाके में हाईकोर्ट आदेशों की धज्जियां, जेडीए की चुप्पी सवालों के घेरे में
जयपुर: राजधानी जयपुर में भू-माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। आमेर क्षेत्र के ईको-सेंसेटिव जोन में नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण के जोन-2 क्षेत्र में ठाठर गांव के पास नाहरगढ़ सेंचुरी से सटे अरावली पहाड़ी की तलहटी में प्राइम सिटी और मोहम्मद नगर के नाम से अवैध बसावट तेजी से हो रही है। यह पूरा इलाका ईको-सेंसेटिव जोन में आता है, जहां किसी भी तरह की आवासीय या कॉमर्शियल कॉलोनी पर पूर्ण प्रतिबंध है।
Eco Sensitive Zone Jaipur में खुलेआम अवैध निर्माण
जानकारी के अनुसार, करीब 40 बीघा कृषि भूमि पर प्राइम सिटी और इससे सटी 10 बीघा भूमि पर मोहम्मद नगर के नाम से कॉलोनी काटी जा रही है। बिना लैंड कंवर्जन और बिना किसी वैध अनुमति के भूखंडों की प्लॉटिंग की जा रही है। यहां दिन-रात चारदीवारी बनाई जा रही है और कुछ जगहों पर मकान भी खड़े हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब कुछ खुलेआम हो रहा है, लेकिन जेडीए की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
RERA Approval का झांसा देकर बेचे जा रहे भूखंड
भू-माफिया लोगों को यह कहकर भूखंड बेच रहे हैं कि प्राइम सिटी योजना रेरा से रजिस्टर्ड और जेडीए से अप्रूव्ड है। कब्जा पत्रों पर रेरा नंबर जैसी मोहर लगाकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि यह स्कीम पूरी तरह अवैध है। ईको-सेंसेटिव जोन में होने के कारण न तो रेरा और न ही जेडीए यहां किसी आवासीय कॉलोनी को मंजूरी दे सकता है। इसके बावजूद 1027 भूखंड प्राइम सिटी में और 220 भूखंड मोहम्मद नगर में सृजित किए जा चुके हैं।
High Court Order Violation का आरोप
यह पूरा मामला बहुचर्चित गुलाब कोठारी प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों की खुली अवहेलना माना जा रहा है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही ईको-सेंसेटिव और ग्रीन जोन में किसी भी तरह के निर्माण पर सख्त रोक लगा चुके हैं। बावजूद इसके कॉलोनाइजर्स और डवलपर्स धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जेडीसी, आईजी जेडीए और अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
नाहरगढ़ सेंचुरी से सटे इस क्षेत्र में अवैध बसावट न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सीधी अवहेलना भी है। सवाल यह है कि क्या जेडीए, वन विभाग और प्रशासन समय रहते कार्रवाई करेगा या भू-माफिया इसी तरह ईको-सेंसेटिव जोन को कंक्रीट में बदलते रहेंगे।
