उदखेड़ गांव की सुरेखा भानगे और चेतना काळमेघ बनें ग्रामीण नारी शक्ति की पहचान
अमरावती। विदर्भ की धरती से एक प्रेरणादायक कहानी देश की राजधानी तक पहुंची है। अमरावती जिले के छोटे से गांव उदखेड़ की दो सामान्य लेकिन संकल्पशील महिलाओं ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरा क्षेत्र गर्व कर रहा है। सुरेखा मनोहर भानगे और चेतना अश्विन काळमेघ को 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का विशेष निमंत्रण मिला है। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं है। बल्कि यह ग्रामीण भारत की नारी शक्ति के बढ़ते आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का प्रतीक है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से राष्ट्रीय मंच तक
सुरेखा और चेतना दोनों ही साधारण किसान परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह चुनी। इसके परिणामस्वरूप उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
धान फाउंडेशन की अहम भूमिका
इस सफलता के पीछे ‘धान फाउंडेशन’ की दूरदर्शी सोच और सतत प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है। फाउंडेशन लंबे समय से भटक्या-विमुक्त जमाती और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर रहा है। प्रोग्राम लीडर शिवानंदन सर के नेतृत्व और अनिल दवणे के मार्गदर्शन में महिलाओं को बचत गट, वित्तीय साक्षरता और आजीविका से जोड़ा गया। धीरे-धीरे इन प्रयासों ने महिलाओं को आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि नेतृत्व के लिए भी तैयार किया।
शासन स्तर पर मिली पहचान
इन सामाजिक नवाचारों और जमीनी कार्यों की प्रशासनिक स्तर पर सराहना हुई। शासन ने सुरेखा और चेतना के संघर्ष, योगदान और सामाजिक बदलाव की भूमिका को देखते हुए उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह निमंत्रण इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी राष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।
कर्तव्य पथ पर अमरावती की बेटियां
26 जनवरी 2026 को जब कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन होगा, तब अमरावती की इन बेटियों की उपस्थिति हर ग्रामीण महिला के लिए प्रेरणा बनेगी। यह क्षण न केवल उनके जीवन की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि पूरे विदर्भ क्षेत्र के सामाजिक विकास की नई कहानी भी है।
