निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रशासनिक फेरबदल, रिटायर्ड IAS मंजीत सिंह बने स्पेशल ऑब्जर्वर
चुनाव से पहले आयोग की प्रशासनिक सर्जरी
असम में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. आयोग ने राज्य में चुनावी तैयारियों को मजबूत करने के लिए कई अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं. चुनाव आयोग ने पांच जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों यानी SSP को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. आयोग का कहना है कि यह कदम चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है. प्रशासनिक स्तर पर यह बदलाव चुनाव से पहले व्यवस्था को सख्त बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
पांच जिलों के SSP बदले गए
चुनाव आयोग ने असम के कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस प्रशासन में बदलाव किया है. जिन जिलों के SSP को हटाया गया है उनमें माजुली, दक्षिण सलमारा, चिरांग और धेमाजी जैसे इलाके शामिल हैं. आयोग ने इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर नए अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि इन जिलों में चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है.
स्पेशल ऑब्जर्वर की नियुक्ति
चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष पर्यवेक्षक की भी नियुक्ति की है. रिटायर्ड IAS अधिकारी मंजीत सिंह को असम के लिए स्पेशल ऑब्जर्वर बनाया गया है. उनकी जिम्मेदारी राज्य में चुनाव से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे. आयोग का मानना है कि अनुभवी अधिकारी की निगरानी से चुनावी प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी.
IAS अधिकारियों के पैनल की मांग
इसके अलावा चुनाव आयोग ने असम सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर नए IAS अधिकारियों के नामों का पैनल मांगा है. इन अधिकारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी यानी DEO के रूप में नियुक्त किया जाएगा. आयोग चाहता है कि चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की ढिलाई न रहे. इसलिए योग्य और अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है.
पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की कोशिश
चुनाव आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है. इसी वजह से चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं. आयोग का मानना है कि इन कदमों से चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बेहतर बनी रहेगी और मतदाता भी बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे.
