बोले– अगर आप झारखंड में रहते हैं, तो सरकार से किसी भी नीति या न्याय की उम्मीद छोड़ दीजिए
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने झारखंडवासियों के नाम एक लंबा संदेश लिखते हुए कानून-व्यवस्था, व्यापार, खेती, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह संदेश उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है, जो अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
“सरकार नागरिकों की सुरक्षा से पीछे हटी”
बाबूलाल मरांडी ने लिखा कि अगर आप झारखंड में रहते हैं और सफल व्यवसाय चला रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर चुकी है। मरांडी के अनुसार, कारोबारियों को अब अपने परिवार और कर्मचारियों की सुरक्षा खुद ही करनी पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में व्यापार करने वालों को अपहरण, फिरौती और भयादोहन जैसी स्थितियों के लिए तैयार रहना होगा। उनका आरोप है कि कई बार यह डर केवल अपराधियों से ही नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र से भी महसूस किया जाता है।
खेती और जमीन को लेकर सरकार पर आरोप
मरांडी ने किसानों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सरकार ने समर्थन मूल्य को लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि किसानों को अपनी फसल कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में जमीन घोटालों का खतरा बढ़ गया है और किसानों को अपनी जमीन को “घोटालेबाज मंत्रियों की नजर” से बचाकर रखने की जरूरत है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर कोई झारखंड में रहता है और गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, तो उसे पहले से बड़ी रकम का इंतजाम कर लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल कभी भी ढह सकते हैं, दवाइयां खत्म हो जाती हैं और वेंटिलेटर अक्सर खराब पड़े रहते हैं।
शिक्षा और युवाओं को लेकर चिंता
मरांडी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर आप झारखंड में रहते हैं और आदिवासी हैं, तो शिक्षा की उम्मीद छोड़ दीजिए और अपनी जमीनों को अवैध घुसपैठियों से बचाने के लिए लगातार संघर्ष करने को तैयार रहिए। युवाओं को लेकर उन्होंने लिखा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों को साल-दर-साल भर्तियों का इंतजार करना पड़ता है। कभी फॉर्म निकलते हैं, तो कभी रद्द हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को बार-बार आवेदन करने, नौकरी “खरीदने” की क्षमता रखने और फिर भी घोटालों की मार सहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
“सरकार से न्याय की उम्मीद छोड़ दीजिए”
अपने संदेश के अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर आप झारखंड में रहते हैं, तो मुख्यमंत्री या सरकार से किसी भी नीति या न्याय की उम्मीद करना छोड़ दीजिए। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि बस सरकार के विदेशी दौरों और “शॉपिंग टूर” की “सफलता” पर बधाई संदेश देना मत भूलिए। मरांडी का यह बयान सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि हेमंत सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है।
