बनभूलपुरा में सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद सन्नाटा और चिंता

बनभूलपुरा हल्द्वानी में रेलवे ट्रैक के पास बसे मकान और तैनात पुलिस बल का दृश्य
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनभूलपुरा इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई, हजारों परिवारों के भविष्य पर संशय

अतिक्रमण हटाने के संकेत, पुनर्वास के लिए सामाजिक-आर्थिक सर्वे का आदेश

उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में इन दिनों बेचैनी का माहौल है। रेलवे अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा रुख ने यहां रहने वाले हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि जमीन रेलवे और राज्य सरकार की है, इसलिए अवैध कब्जे हटाए जा सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने सरकार को 19 मार्च से प्रभावित 5365 परिवारों का सामाजिक और आर्थिक सर्वे कराने का निर्देश भी दिया है, ताकि यह तय हो सके कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास के पात्र हैं या नहीं।


😟 लोगों के भविष्य को लेकर चिंता

News18 की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, बनभूलपुरा में रेलवे स्टेशन से सटी करीब 30 हेक्टेयर जमीन पर बसे लोग फैसले पर टकटकी लगाए बैठे थे। जैसे ही सामाजिक-आर्थिक सर्वे का आदेश आया, कई परिवार मायूस नजर आए। इन दिनों रमजान का महीना चल रहा है। दिन में रोज़ा और रात में इफ्तार के बाद चर्चा का मुख्य विषय सिर्फ एक है — “अब आगे क्या?” नमाज़ के बाद मस्जिदों में दुआएं की गईं। चाय की टपरियों से लेकर घरों तक, हर जगह भविष्य को लेकर डर और असमंजस की स्थिति है।


🏚️ तीन तरह के लोग रहते हैं इलाके में

अतिक्रमण वाले इस क्षेत्र में तीन श्रेणियों के लोग रह रहे हैं:

  1. पुराने निवासी – जिनके पास कुछ फ्रीहोल्ड पट्टे या दस्तावेज हैं और वे वर्षों से यहां रह रहे हैं।
  2. दूसरे राज्यों से आए लोग – जिन्होंने स्टांप पेपर पर जमीन खरीदी या कब्जा किया।
  3. बेघर तबका – जिनके पास कहीं और घर या जमीन नहीं है, खासकर गफूर बस्ती और ढोलक बस्ती के लोग।

इन बस्तियों में रहने वाले लोग मांग कर रहे हैं कि हटाने से पहले उन्हें वैकल्पिक आवास दिया जाए।


📊 कितने लोग होंगे प्रभावित?

  • रेलवे की जमीन पर 3614 पक्के स्ट्रक्चर बने हैं
  • इनमें घरों के अलावा कुछ मस्जिद और मंदिर भी शामिल हैं
  • कुल 5365 परिवार यहां रहते हैं
  • अनुमानित 30-35 हजार लोग प्रभावित हो सकते हैं

अगर विस्थापन का आदेश लागू होता है, तो यह उत्तराखंड के सबसे बड़े पुनर्वास अभियानों में से एक हो सकता है।


🚓 प्रशासन अलर्ट मोड में

इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है।
सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेई के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। फिलहाल सबकी निगाहें सामाजिक-आर्थिक सर्वे और आगे आने वाले प्रशासनिक फैसलों पर टिकी हैं।

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