बांग्लादेश में नई सियासत की शुरुआत

ढाका में शपथ लेते मंत्री और तारिक रहमान की रैली का दृश्य
बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद मंत्री पद की शपथ लेते नेता

तारिक रहमान ने कैबिनेट में दिए 2 अल्पसंख्यक नेताओं को स्थान

बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में जीत के बाद तारिक रहमान ने अपनी नई कैबिनेट का गठन कर दिया है। ढाका में 25 सांसदों ने मंत्री पद की शपथ ली। इस बार कैबिनेट में दो अल्पसंख्यक चेहरों को शामिल किया गया है। इसलिए इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इनमें निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान का नाम प्रमुख है। खास बात यह है कि ऐसे समय में यह फैसला लिया गया है जब देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कौन हैं निताई रॉय चौधरी

निताई रॉय चौधरी 1949 में जन्मे वरिष्ठ वकील और राजनेता हैं। उन्होंने मगुरा-2 सीट से चुनाव जीता। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशी को 30 हजार से अधिक वोटों से हराया। उन्हें 1,47,896 वोट मिले। वे पार्टी के रणनीतिकार माने जाते हैं। पहले चर्चा थी कि उनके समधी और पूर्व मंत्री गोयेश्वर चंद्र रॉय को जगह मिलेगी। हालांकि अंतिम समय में निताई रॉय को कैबिनेट में शामिल किया गया।

दीपेन दीवान का राजनीतिक सफर

दूसरे अल्पसंख्यक नेता दीपेन दीवान रंगमती जिले से सांसद चुने गए हैं। वे चकमा समुदाय से आते हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हराकर जीत दर्ज की। हालांकि उनकी धार्मिक पहचान को लेकर अलग-अलग दावे हैं। लेकिन उन्हें अल्पसंख्यक प्रतिनिधि के तौर पर देखा जा रहा है।

मां की राह पर तारिक रहमान

तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के कार्यकाल में भी हिंदू मंत्री शामिल रहे थे। 1991-1996 के दौरान गोयेश्वर चंद्र रॉय राज्य मंत्री रहे। बाद में 2001-2006 में गौतम चक्रबर्ती को भी जिम्मेदारी दी गई थी। अब तारिक रहमान ने दो अल्पसंख्यक चेहरों को कैबिनेट में शामिल कर संतुलन बनाने की कोशिश की है। इसलिए इसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

क्या सुधरेगी बांग्लादेश की छवि

हाल के महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें आई थीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई। ऐसे में यह फैसला सरकार की छवि सुधारने की दिशा में कदम माना जा रहा है।हालांकि असली परीक्षा कानून व्यवस्था और सुरक्षा हालात सुधारने में होगी। अगर हालात बेहतर होते हैं, तो यह बदलाव स्थायी माना जाएगा।

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