ईद से पहले भोपाल में फतवा विवाद, इमामत पर रोक को लेकर बढ़ी बहस

Bhopal fatwa controversy over imam leading namaz before Eid
ईद से पहले भोपाल में इमामत को लेकर जारी फतवे पर विवाद बढ़ गया है.

प्रोस्टेट बीमारी से जुड़ी धार्मिक राय सोशल मीडिया पर वायरल, मुस्लिम संगठनों ने उठाए सवाल

फतवे से शुरू हुआ विवाद, समुदाय में बढ़ी चर्चा


भोपाल में ईद की तैयारियों के बीच एक धार्मिक फतवे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. दारुल इफ्ता जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी की ओर से जारी एक फतवा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस फतवे में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति को प्रोस्टेट से जुड़ी बीमारी है और उसे पेशाब की बूंदें टपकने की समस्या रहती है, तो वह इमाम बनकर नमाज नहीं पढ़ा सकता. हालांकि वह व्यक्ति खुद नमाज अदा कर सकता है. इसी बात को लेकर अब धार्मिक और सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई है. दरअसल यह फतवा 9 मार्च 2026 को नायब मुफ्ती सैयद अहमद खान कासमी द्वारा एक सवाल के जवाब में जारी किया गया था. दस्तावेज में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिखा गया है. लेकिन इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इसे भोपाल के शहर काजी से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है. इसी कारण कई लोग इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और मामला अब विवाद का रूप लेता जा रहा है.

क्या कहता है इस्लामी फिक्ह का नियम


दारुल इफ्ता की ओर से जारी धार्मिक राय में बताया गया है कि जिस व्यक्ति को लगातार पेशाब टपकने की बीमारी होती है उसे इस्लामी फिक्ह में ‘माजूर’ माना जाता है. ऐसे व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नमाज पढ़ने की अनुमति होती है. लेकिन वह इमाम बनकर दूसरों को नमाज नहीं पढ़ा सकता. फतवे में यह भी कहा गया है कि यदि किसी ने ऐसे व्यक्ति के पीछे फर्ज नमाज पढ़ ली हो, तो उसे दोबारा नमाज अदा करनी चाहिए. हालांकि कुछ इस्लामी विद्वानों का कहना है कि यह केवल शरीयत के नियम की व्याख्या है. इसलिए इसे किसी खास व्यक्ति से जोड़ना उचित नहीं है. फिर भी सोशल मीडिया पर चर्चा के कारण विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है.

मुस्लिम संगठनों ने जताई आपत्ति


दूसरी ओर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस फतवे पर आपत्ति जताई है. कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि ईद से ठीक पहले इस तरह का फतवा सामने आना कई सवाल खड़े करता है. कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि शहर काजी मुश्ताक अली नदवी पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित रूप से नमाज पढ़ा रहे हैं. ऐसे में बीमारी का हवाला देकर फतवा जारी करना अनुचित लगता है. उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेज में किसी का नाम नहीं है, लेकिन जिस तरह इसे सोशल मीडिया पर फैलाया गया उससे भ्रम की स्थिति बन गई है.

पुलिस शिकायत की तैयारी


कमेटी ने फतवा जारी करने वाले मुफ्ती पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. शमशुल हसन ने कहा कि जिन पर पहले से कई आपराधिक मामले अदालत में लंबित हों, उन्हें इस तरह का विवादित बयान देने से पहले अपने आचरण पर भी ध्यान देना चाहिए. इसके साथ ही कमेटी ने कहा कि यदि इस मामले में जल्द स्पष्टता नहीं आई तो शाहजहांनाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई जाएगी. उनका आरोप है कि फतवे को सोशल मीडिया पर वायरल कर समुदाय में भ्रम फैलाया गया है. इसलिए इसकी जांच होना जरूरी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

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