बिहार में शराबबंदी पर छिड़ी बहस, सरकार क्या सोच रही है? जदयू विधायक ने बताया रुख

Nitish Kumar and Bihar Assembly debate on liquor ban
बिहार में शराबबंदी को लेकर विधानसभा में तेज हुई सियासी बहस

समीक्षा की मांग के बीच जदयू का दावा – आंतरिक सर्वे में जनता ने शराबबंदी के पक्ष में दी राय

बिहार में शराबबंदी एक बार फिर सियासत के केंद्र में है। दरअसल सदन में समीक्षा की मांग उठने के बाद बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच नीतीश कुमार की सरकार का रुख क्या है, यह सवाल चर्चा में है।

समीक्षा की मांग से बढ़ी हलचल

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने सदन में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की थी। उन्होंने कहा कि इससे राज्य को वित्तीय नुकसान हो रहा है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई। हालांकि सत्तारूढ़ दल जदयू की ओर से अलग संकेत मिले हैं।

जदयू विधायक का बड़ा दावा

रोहतास जिले के करगहर से जदयू विधायक वशिष्ठ सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि सरकार कई बार आंतरिक सर्वे करा चुकी है। उनके अनुसार सर्वे में जनता ने शराबबंदी जारी रखने के पक्ष में राय दी है। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर स्थिति का आकलन करती है। साथ ही जनता की भावना को प्राथमिकता देती है।

पहले क्या थी स्थिति?

वशिष्ठ सिंह ने कहा कि शराबबंदी से पहले हालात अलग थे। उस समय खुलेआम शराब की बिक्री होती थी। इसके कारण सामाजिक समस्याएं बढ़ती थीं। उन्होंने दावा किया कि जनप्रतिनिधियों को भी अपमान झेलना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति बदली है। अब खुलेआम हंगामा करने की हिम्मत कोई नहीं करता।

सरकार का संकेत क्या है?

बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इस पर विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कहा कि शराबबंदी सभी दलों की सहमति से लागू हुई थी। उन्होंने समीक्षा की मांग को खारिज किया। साथ ही कहा कि यह कानून लागू है और लागू रहेगा।

सियासत के बीच सामाजिक मुद्दा

Bihar Liquor Ban Debate अब केवल राजनीतिक नहीं रहा। यह सामाजिक और आर्थिक बहस का विषय भी बन चुका है। कुछ नेता समीक्षा चाहते हैं।वहीं कई इसे सामाजिक सुधार का बड़ा कदम मानते हैं। फिलहाल सरकार की ओर से संकेत यही हैं कि जनता की भावना सर्वोपरि रहेगी। हालांकि आने वाले समय में यह मुद्दा फिर गरमा सकता है।

Read More :- मेरठ मेट्रो और नमो भारत स्टेशनों पर कब आएगी पहली और आखिरी ट्रेन? यहां देखें पूरी समय सारिणी