बोरे पर पढ़ाई से एयर इंडिया के कैप्टन तक, सहरसा के बेटे ने रचा इतिहास
बिहार के सहरसा जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे चंदन ने संघर्ष की ऐसी कहानी लिखी है, जो हर युवा को प्रेरित करती है। बचपन में घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। बड़े निजी स्कूल में पढ़ाई संभव नहीं थी। इसलिए उन्होंने सरकारी स्कूल में बोरा बिछाकर पढ़ाई की। संसाधन सीमित थे। लेकिन सपने बड़े थे। एक रात घर की छत पर सोते समय उन्होंने आसमान में उड़ता हवाई जहाज देखा। उसी पल उन्होंने तय कर लिया कि एक दिन वे भी विमान उड़ाएंगे।
कम उम्र में लौटा दिए गए, फिर भी नहीं मानी हार
स्कूल और कॉलेज के दिनों में उन्होंने पायलट बनने की जानकारी जुटानी शुरू की। उन्होंने फ्लाइंग क्लब में दाखिला लेने की कोशिश की। हालांकि कम उम्र होने के कारण उन्हें मना कर दिया गया। यह बड़ा झटका था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित संस्था Indira Gandhi Rashtriya Uran Akademi में प्रवेश का लक्ष्य तय किया। कड़ी मेहनत की। प्रवेश परीक्षा पास की। पूरे देश से चुने गए 40 अभ्यर्थियों में उनका नाम शामिल हुआ।
17 साल के संघर्ष के बाद मिली सफलता
अकादमी में प्रशिक्षण बेहद कठिन था। अनुशासन सख्त था। पढ़ाई और तकनीकी अभ्यास चुनौतीपूर्ण था। फिर भी चंदन ने हर मुश्किल को स्वीकार किया। आर्थिक दबाव भी था। प्रतिस्पर्धा भी थी। लेकिन उनका लक्ष्य साफ था। करीब 17 वर्षों की मेहनत और अनुभव के बाद उनका सपना सच हुआ। आज वे देश की प्रतिष्ठित विमानन कंपनी Air India में कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं। जब वे हजारों फीट ऊपर विमान उड़ाते हैं, तो उन्हें अपना संघर्ष याद आता है। साथ ही अपने गांव और जिले का नाम रोशन करने का गर्व भी महसूस होता है।
अब बच्चों को भी देंगे उड़ान
कैप्टन चंदन अब नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने सहरसा में काइनेसिस इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की स्थापना की है। यह स्कूल आधुनिक तकनीक और एआई आधारित शिक्षा पर केंद्रित होगा। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और तकनीक से ग्रामीण बच्चे भी बड़े सपने पूरे कर सकते हैं। सरकारी स्कूल में बोरे पर बैठकर पढ़ाई करने वाला यह लड़का आज आसमान में उड़ान भर रहा है। उनकी कहानी साबित करती है कि सपने गरीबी नहीं देखते। वे केवल मेहनत और हौसले की मांग करते हैं।
