GST के दौर में भी क्यों खास है 24 फरवरी, जानिए पूरा इतिहास और महत्व
भारत में 24 फरवरी केवल एक तिथि नहीं है। यह देश की आर्थिक मजबूती की याद दिलाने वाला दिन है। हर साल इस दिन केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 1944 में लागू हुए ऐतिहासिक कानून की स्मृति में मनाया जाता है।
1944 का ऐतिहासिक कानून
ब्रिटिश काल में लागू Central Excise and Salt Act, 1944 ने देश में उत्पाद शुल्क व्यवस्था को संगठित ढांचा दिया। इसके माध्यम से देश में निर्मित वस्तुओं पर कर निर्धारित किया गया।बाद में Central Excise Tariff Act, 1985 के जरिए कर दरों को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत किया गया। इस कानून ने राजस्व संग्रह को व्यवस्थित बनाया। इसी राजस्व ने दशकों तक देश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत रखा।
कौन संभालता है यह व्यवस्था?
उत्पाद शुल्क प्रणाली का संचालन Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) करता है। यह संस्था वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करती है। देश को 10 जोनों में बांटा गया है। लगभग 61 आयुक्तालय कर संग्रह और प्रवर्तन का कार्य करते हैं। इस संरचना से कर चोरी और तस्करी पर अंकुश लगाया जाता है।
GST के बाद भी क्यों जरूरी?
2017 में Goods and Services Tax लागू हुआ। इसके बाद अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में बड़ा बदलाव आया। फिर भी कुछ वस्तुओं पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क आज भी लागू है। जैसे पेट्रोलियम उत्पाद। तंबाकू उत्पाद। ये राजस्व का अहम स्रोत बने हुए हैं।
दिवस का उद्देश्य
यह दिवस केवल औपचारिकता नहीं है। बल्कि कर अनुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। देशभर में सेमिनार आयोजित होते हैं। उद्योग जगत के लिए कार्यशालाएं होती हैं। ईमानदार अधिकारियों को सम्मानित किया जाता है।
क्यों है यह दिन खास?
उत्पाद शुल्क दशकों तक भारत सरकार की आय का मुख्य आधार रहा। इसी राजस्व से आधारभूत संरचना विकसित हुई।सामाजिक कल्याण योजनाएं संचालित हुईं। आर्थिक स्थिरता बनी रही। स्पष्ट है कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस प्रशासनिक दक्षता और कर अनुशासन का प्रतीक है। 24 फरवरी हमें याद दिलाता है कि मजबूत कर व्यवस्था ही राष्ट्र की आर्थिक नींव होती है।
