सरकार ने शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट, यूरिया बिक्री को Agri Stack से जोड़ा जाएगा
खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव
देश के किसानों के लिए सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। अब खाद की बिक्री को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार एग्री स्टैक (Agri Stack) के जरिए यूरिया की बिक्री को डिजिटल फार्मर आईडी से जोड़ने जा रही है। यह व्यवस्था फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की जा रही है। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा।
क्या है डिजिटल फार्मर आईडी
डिजिटल फार्मर आईडी वही पहचान पत्र है, जिसका इस्तेमाल पीएम-किसान योजना के पंजीकरण में किया जा रहा है। यह आईडी किसान की पूरी प्रोफाइल को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखती है। इसमें किसान की डेमोग्राफिक जानकारी, जमीन का रिकॉर्ड और खेती से जुड़ा डेटा शामिल होता है। सरकार का लक्ष्य है कि सब्सिडी वाली खाद केवल असली किसानों तक ही पहुंचे।
Agri Stack से जुड़ेगा खाद वितरण सिस्टम
एग्री स्टैक एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो किसानों, सरकारी योजनाओं और डेटा को एक मंच पर लाता है। इसके जरिए खाद वितरण को ट्रैक किया जाएगा। इससे खाद की कालाबाजारी और औद्योगिक इकाइयों की ओर होने वाले डायवर्जन पर रोक लगेगी। अब वही किसान खाद खरीद पाएगा, जिसकी जमीन और खेती का रिकॉर्ड सिस्टम में दर्ज होगा।
अब तक कितनी बनी डिजिटल फार्मर आईडी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 4 दिसंबर 2025 तक देश में लगभग 7.67 करोड़ डिजिटल फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत इस संख्या को तेजी से बढ़ाने पर काम कर रही है। आने वाले समय में यह आईडी किसानों के लिए अनिवार्य दस्तावेज बन सकती है।
डिजिटल फार्मर आईडी कैसे बनवाएं
किसान दो तरीकों से अपनी डिजिटल फार्मर आईडी बनवा सकते हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया में किसान राज्य के एग्री स्टैक पोर्टल या फार्मर रजिस्ट्री ऐप पर जाकर आधार नंबर से eKYC पूरा कर सकते हैं। इसके बाद जमीन से जुड़ी जानकारी भरनी होगी और सहमति देकर ई-साइन करना होगा।
ऑफलाइन प्रक्रिया के तहत किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC पर जाकर भी यह आईडी बनवा सकते हैं।
किसानों को क्या होगा फायदा
इस नई व्यवस्था से खाद की उपलब्धता पारदर्शी होगी। सब्सिडी का सीधा लाभ सही किसान तक पहुंचेगा। साथ ही फर्जी खरीद और अवैध बिक्री पर भी रोक लगेगी। सरकार का मानना है कि इससे खेती से जुड़े संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
