अनोखे नाम और स्वाद के लिए लोग रुके, फूड ब्लॉगर भी आए
दुश्मन कचौरी वाला’ की कहानी
दुकान के ऑनर कैलाश बताते हैं कि पहले यहां एक चाय की टपरी थी। उनके दोस्तों ने सुझाव दिया कि चाय के साथ कचौड़ी भी शुरू करें। बॉलीवुड के गाने “दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया है” से प्रेरणा लेकर दुकान का नाम रखा गया और यह तुरंत फेमस हो गई।
‘दोस्त कचौरी वाला’ कैसे बना
दुश्मन कचौड़ी वाले के पास ही एक और दुकान थी। इसके ऑनर विष्णु खंडेलवाल कहते हैं, “जहां दुश्मनी हो, वहां दोस्ती भी पनपती है। इसलिए हमने अपनी दुकान का नाम दोस्त कचौरी वाला रखा।”
स्वाद और लोकप्रियता
दोनों दुकानों पर कचौड़ी, समोसा, मिर्च बड़ा, ब्रेड पकोड़ा, प्याज की कचौड़ी और जलेबी मिलती हैं। दुश्मन कचौरी वाले पर भीड़ ज्यादा रहती है, लेकिन लोग दोनों ही दुकानों के स्वाद का आनंद बारी-बारी से लेते हैं।
जयपुर में ब्रांड बन चुकी दुकानें
रामगढ़ मोड़ की ये दुकानें सिर्फ नाम नहीं, बल्कि ब्रांड बन चुकी हैं। लोकल लोग, पर्यटक, फूड ब्लॉगर और विदेशी इन दुकानों पर रुककर नाम और स्वाद दोनों का मजा लेते हैं। सुबह 7 बजे से भीड़ लगने लगती है और दोपहर तक स्टॉक खत्म हो जाता है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
इन दुकानों के यूनिक नाम और स्वाद की वजह से ग्राहक खुद सोशल मीडिया पर मुफ्त में इनका प्रचार करते हैं। जयपुर में यह कॉम्बिनेशन और स्वाद लोगों को बार-बार खींचता है।
