जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने देशभर के नवोदय विद्यालय में EWS छात्रों को प्रवेश न दिए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने जारी किया नोटिस
मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ में हुई। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, यह मामला EWS छात्रों के अधिकारों से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है।
छात्रा की याचिका से उठा मामला
जबलपुर निवासी छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी ने याचिका दायर की है। इसमें कहा गया कि नवोदय विद्यालयों का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को बेहतर शिक्षा देना है, लेकिन EWS वर्ग को इसमें शामिल नहीं किया गया।
EWS को नहीं मिल रहा लाभ
याचिका में बताया गया कि नवोदय विद्यालयों में SC, ST, OBC, ग्रामीण छात्रों, बालिकाओं और दिव्यांगों के लिए आरक्षण है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में देखें तो, इससे यह वर्ग पूरी तरह प्रवेश प्रक्रिया से वंचित रह जाता है।
संवैधानिक प्रावधान का हवाला
याचिकाकर्ता ने 103वां संविधान संशोधन का हवाला दिया है। इसके तहत अनुच्छेद 15(6) में EWS वर्ग के लिए शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
इसके बावजूद नवोदय विद्यालयों में इस नियम को लागू नहीं किया गया, जिसे संविधान की अनदेखी बताया गया है।
एक ही मंत्रालय, फिर अलग नियम क्यों?
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया कि केंद्रीय विद्यालय में EWS छात्रों को प्रवेश का लाभ मिलता है, जबकि उसी शिक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले नवोदय विद्यालयों में ऐसा प्रावधान नहीं है।
इसे भेदभावपूर्ण और असंगत बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
याचिका में Atharv Chaturvedi बनाम राज्य मध्यप्रदेश के फैसले का भी जिक्र किया गया है। इसमें EWS छात्रों को अवसर न मिलने को गंभीर मुद्दा माना गया था।
लाखों छात्र हो सकते हैं प्रभावित
याचिकाकर्ता के अनुसार, देशभर में नवोदय विद्यालयों में करीब 2.9 लाख छात्र पढ़ रहे हैं। ऐसे में 2019 से अब तक बड़ी संख्या में EWS छात्र प्रवेश से वंचित रह गए हैं।
जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
याचिकाकर्ता के वकील विकास मिश्रा ने कहा कि यह सिर्फ एक छात्र का मामला नहीं, बल्कि देशभर के लाखों छात्रों से जुड़ा मुद्दा है। जरूरत पड़ने पर इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।
