एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की आशंका बढ़ी
आजकल शादीशुदा रिश्तों पर शक केवल घर तक सीमित नहीं रह गया है। कपल अक्सर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की जांच के लिए प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों से संपर्क कर रहे हैं। एजेंसियों का कहना है कि उनके पास आने वाले मामलों में लगभग 40 प्रतिशत एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से जुड़े होते हैं। आश्चर्यजनक रूप से 90 प्रतिशत मामलों में शक सही निकलता है। यानी हर 10 में से 9 मामलों में शक सही साबित हो रहा है।
एजेंसी हायर करना आसान नहीं
अक्सर कपल पहले अपने स्तर पर फोन, सोशल मीडिया और व्यवहार में आए बदलाव को समझने की कोशिश करते हैं। जब शक बढ़ता है और रिश्ते में टकराव आता है, तब एजेंसी हायर की जाती है। एक दिन की सर्विलांस का खर्च 6 से 7 हजार रुपए तक होता है। एक हफ्ते की जांच में 40 से 50 हजार रुपए तक खर्च हो सकते हैं। एनआरआई परिवारों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली और अन्य बड़े शहरों की एजेंसियां पंजाब में भी सक्रिय हो रही हैं। पूरे पंजाब में हर महीने करीब 300 केस एजेंसियों तक पहुंच रहे हैं।
केस स्टडीज़ से मिला सच
केस 1: यूके से जुड़ा मामला – पत्नी भारत आई थी, फोन बिजी और व्यवहार बदल गया। जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। यह उदाहरण है कि हर शक सच में नहीं बदलता।
केस 2: आर्मी ऑफिसर का मामला – पत्नी जालंधर में रह रही थी। डिटेक्टिव ने मूवमेंट और मुलाकातों की निगरानी की। अफेयर की पुष्टि हुई।
केस 3: मोहाली का ऑफिस अफेयर – शक की वजह से सड़क पर बहस और हाथापाई हुई। सार्वजनिक जगह पर टकराव से रिश्तों की कड़वाहट सामने आई।
केस 4: विदेश से आई महिला – पति को शक था कि अफेयर चल रहा है। एजेंसी ने कॉल पैटर्न और मुलाकातों की निगरानी की। फोटो और सबूतों के साथ रिपोर्ट परिवार और वकीलों तक भेजी गई।
विशेषज्ञ का नजरिया
भास्कर के चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर विकास सोनकर कहते हैं कि डिटेक्टिव एजेंसी तक आने वाले लोग हल्के शक में नहीं होते।
यह लंबा मानसिक प्रोसेस होता है और कई घर पहले ही अंदर से टूट चुके होते हैं।
जांच का उद्देश्य केवल पकड़ना नहीं, बल्कि सबूतों के साथ सच सामने लाना होता है।
बढ़ती दूरी, कम संवाद, लंबी पोस्टिंग, एनआरआई लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया ने रिश्तों को कमजोर बना दिया है।
रिश्तों को बचाने के लिए समय रहते बातचीत और समझौता जरूरी है।
