रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बावजूद खुले अस्पताल, ऑपरेशन के बाद मौत और सिस्टम की बड़ी चूक सामने आई
कैसे सामने आया फर्जी डॉक्टरों का खेल
राजस्थान में फर्जी MBBS डॉक्टरों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जांच में सामने आया कि कई लोग नकली डिग्री के दम पर वर्षों से इलाज कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सच्चाई उजागर होने के बाद भी इन पर कोई सख्त रोक नहीं लगी। नतीजतन, मरीजों की जान लगातार खतरे में बनी हुई है।
पाली का मामला, जहां फर्जी डॉक्टर बेखौफ है
पाली जिले में मोहनलाल भाटी नाम का व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर क्लिनिक चला रहा है। चार साल पहले पुलिस जांच में उसकी MBBS डिग्री फर्जी पाई गई थी। इसके बावजूद वह बांगड़ हॉस्पिटल के सामने आज भी मरीज देख रहा है। भास्कर रिपोर्टर जब मरीज बनकर पहुंचा, तो भाटी ने जांच, एक्स-रे और दवाइयों की सलाह दी। इसके अलावा उसने बीमारी को गंभीर बताकर डर का माहौल भी बनाया।
ओवरएज एडमिशन और फर्जी रजिस्ट्रेशन का सच
दस्तावेजों के अनुसार मोहनलाल ने उम्र सीमा से ज्यादा होने के बावजूद MBBS में एडमिशन लिया। इसके बाद उसने किसी और के नाम पर मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करा लिया। बाद में जब यह फर्जीवाड़ा सामने आया, तो राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। हालांकि, कार्रवाई यहीं तक सीमित रही।
ऑपरेशन के बाद महिला की मौत
जालोर जिले के रानीवाड़ा में नानजी राम चौधरी नामक फर्जी डॉक्टर ने एक महिला का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद महिला की मौत हो गई। जांच में पता चला कि उसकी डिग्री भी फर्जी थी। रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बावजूद वह फिर से मरीजों का इलाज करता पाया गया।
NMC और मेडिकल काउंसिल की बड़ी खामी
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब स्टेट मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन रद्द कर देती है, तो नेशनल मेडिकल कमीशन के रिकॉर्ड में नाम क्यों बना रहता है। इसी खामी का फायदा उठाकर फर्जी डॉक्टर दूसरे राज्यों में दोबारा रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल
यह मामला केवल कुछ फर्जी डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। यह पूरे हेल्थ सिस्टम की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। जब तक मेडिकल काउंसिल और NMC के डेटा में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा।
