स्मार्ट रोड बनी मुसीबत! मैनहोल दबाने की गलती से फरीदाबाद में 1.5 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

फरीदाबाद स्मार्ट रोड पर सीवर लाइन की सफाई के दौरान निकला मलबा
स्मार्ट रोड के नीचे दबे मैनहोल की तलाश में जुटी टीम

42 करोड़ की सड़क पर गंभीर खामियां, अब सीवर सफाई में लगेगा दो महीने का समय

फरीदाबाद में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बनी सड़क अब सवालों के घेरे में है। शहर की सेक्टर 19-28 को जोड़ने वाली बड़खल स्मार्ट रोड पर बड़ी लापरवाही सामने आई है। सड़क निर्माण के दौरान कई सीवर मैनहोल दबा दिए गए। इस वजह से सालों तक सीवर लाइन की सफाई नहीं हो सकी। धीरे-धीरे आसपास के सेक्टरों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या बढ़ती गई। जब शिकायतें बढ़ीं, तब जांच शुरू हुई। इसके बाद मामला उजागर हुआ।

1.67 किलोमीटर सड़क, 42 करोड़ का बजट

दो साल पहले बड़खल चौक से बाईपास तक 1.67 किलोमीटर सड़क बनाई गई थी। इस परियोजना पर 42 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन निर्माण के दौरान सीवर सिस्टम की अनदेखी की गई। फुटपाथ बनाने से पहले नीचे के नाले की सफाई नहीं हुई। उल्टा मलबा और कीचड़ नाले में ही दबा दिया गया। फिर उसके ऊपर फुटपाथ और रेलिंग लगा दी गई।

अब 1.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च

अब इस गलती को सुधारने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होंगे। Faridabad Metropolitan Development Authority को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। महज डेढ़ महीने में 450 मीटर हिस्से में केवल चार मैनहोल ही ढूंढे जा सके हैं। पूरी 1.67 किलोमीटर सड़क के मैनहोल खोजने और सीवर लाइन साफ करने में कम से कम दो महीने और लगेंगे।

19 फीट नीचे दबे मैनहोल

सीवर लाइन सड़क से लगभग 19 फीट नीचे है। सफाई के दौरान अंदर से पत्थर, ईंट और ठोस मलबा निकल रहा है। इससे साफ है कि निर्माण के समय मलबा सीवर में चला गया था। अगर उस समय निगरानी होती, तो आज अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता।

मंत्री आवास से जुड़ी सड़क पर लापरवाही

खास बात यह है कि यह सड़क केंद्रीय राज्य मंत्री Krishan Pal Gurjar के आवास और कार्यालय को जोड़ती है। इसके बावजूद गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। RTI एक्टिविस्ट अजय सैनी ने जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों ने मैनहोल दबाए, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

अधिकारियों का पक्ष

अथॉरिटी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर समुद्र सिंह के अनुसार, मैनहोल ढूंढना बेहद मुश्किल है। कर्मचारी सीवर लाइन में उतरकर जांच कर रहे हैं। वहीं स्मार्ट सिटी मिशन के मैनेजर बीर सिंह ने कहा कि जहां मैनहोल की जानकारी थी, उन्हें छोड़ा गया। बाकी मामले की जांच की जाएगी। सवाल यह है कि क्या 42 करोड़ की सड़क पर गुणवत्ता जांच नहीं हुई? और क्या इस अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी तय होगी?

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