डिजिटल सुविधा बनी परेशानी, जानकारी के अभाव में बुजुर्ग और ग्रामीण मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
गंगापुर सिटी। राजकीय जिला अस्पताल में ओपीडी पर्ची के लिए शुरू की गई क्यूआर कोड आधारित रजिस्ट्रेशन व्यवस्था फिलहाल मरीजों के लिए राहत की जगह परेशानी बन गई है। लंबी कतारों से निजात दिलाने के उद्देश्य से लागू की गई यह डिजिटल सुविधा जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है।
डिजिटल व्यवस्था, लेकिन जागरूकता शून्य
अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को मोबाइल फोन के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर ओपीडी पर्ची बनाने की सुविधा दी थी। यह व्यवस्था घर बैठे और अस्पताल परिसर में पर्ची बनवाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, अधिकांश मरीजों को इसकी जानकारी ही नहीं है। अस्पताल परिसर में न तो स्पष्ट दिशा-निर्देश लगे हैं और न ही कोई बैनर या पोस्टर दिखाई देता है। ऐसे में मरीज असमंजस की स्थिति में नजर आ रहे हैं।
सुबह से लग रही लंबी कतारें
सुबह जैसे ही ओपीडी शुरू होती है, पर्ची काउंटर पर लंबी कतारें लग जाती हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों की संख्या अधिक होती है। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें क्यूआर कोड से पर्ची बनाने की प्रक्रिया किसी ने नहीं समझाई। मजबूरी में वे पुरानी व्यवस्था के तहत लाइन में लगने को विवश हैं।
तकनीकी दिक्कतें भी बन रहीं बाधा
मरीजों का कहना है कि क्यूआर कोड स्कैन करने पर कई बार मोबाइल में नया ऐप डाउनलोड करने का मैसेज आता है। कमजोर इंटरनेट कनेक्शन के कारण प्रक्रिया बीच में ही अटक जाती है। इसके अलावा, जिन मरीजों के पास स्मार्टफोन नहीं है या जो डिजिटल प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं, वे इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
हेल्प डेस्क की उठी मांग
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल में एक अलग हेल्प डेस्क बनाई जाए और कर्मचारियों द्वारा क्यूआर कोड रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया समझाई जाए, तो यह व्यवस्था वास्तव में कारगर हो सकती है। फिलहाल जानकारी के अभाव में डिजिटल सुविधा का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पा रहा है।
